अकोला में 35 दिनों से बारिश न होने से सूखा संकट, सूखने की कगार पर फसलें और काटेपूर्णा बांध में बचा 24% पानी

Akola Water Crisis: अकोला में 35 दिनों से बारिश न होने से खरीफ फसलें सूख रही हैं। काटेपूर्णा बांध में जलभंडारण गिरकर 24% रह गया है। किसानों ने फसल बीमा और पंचनामा की मांग की है।
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अकोला जिले में बारिश का लंबा इंतजार social media
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Akola Monsoon Gap Kharif Crop Damage Water Scarcity : अकोला जिले में बारिश का लंबा इंतजार अब किसानों के साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा रहा है। शनिवार सुबह आसमान में अचानक घने बादल छा गए और कुछ देर के लिए हल्की बारिश भी हुई। इससे सड़कें गीली हो गईं, लेकिन कुछ ही देर बाद बारिश पूरी तरह थम गई। इसके बाद दिनभर लोग आसमान की ओर बारिश की उम्मीद लगाए देखते रहे, लेकिन दोबारा बारिश नहीं हुई। अकोला जिले में 31 जुलाई से बारिश अचानक थम गई है। करीब 35 दिनों से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसान बेहद चिंतित हैं। कई इलाकों में खरीफ फसलें अब सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। कपास और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।

4.23 लाख हेक्टेयर में खरीफ की बुआई

इस खरीफ सीजन में जिले में करीब 4 लाख 23 हजार 445 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की बुआई की गई है। इनमें करीब 2 लाख 1 हजार 283 हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुआई हुई है। किसानों का कहना है कि बारिश नहीं होने से सोयाबीन की फसल अब हाथ से निकलती जा रही है।

फूल अवस्था में फसलें, पानी की जरूरत

इस समय सोयाबीन और कपास की फसल फूल आने की अवस्था में है। ऐसे समय में खेतों को पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसलों पर गंभीर असर पड़ रहा है। सोयाबीन, कपास, तुअर और हल्दी जैसी प्रमुख फसलें मुरझाने लगी हैं। लगातार सूखे मौसम के कारण खरीफ फसलों की बढ़वार रुक गई है और उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।

काटेपूर्णा बांध में सिर्फ 24 प्रतिशत पानी

बारिश की कमी का असर जलस्रोतों पर भी दिखाई दे रहा है। महान गांव स्थित काटेपूर्णा बांध से अकोला शहर को जलापूर्ति की जाती है। फिलहाल बांध में करीब 24 प्रतिशत जलभंडारण है। पिछले वर्ष इसी अवधि में बांध में लगभग 77 प्रतिशत पानी उपलब्ध था। ऐसे में जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले समय में जलसंकट गंभीर होने की आशंका है।

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नुकसान के पंचनामे की मांग

बारिश के लंबे अंतराल के कारण जिन क्षेत्रों में खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है, वहां प्रशासन से तत्काल पंचनामा कराने की मांग किसान कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि नुकसान का आकलन जल्द किया जाना चाहिए, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सके।

किसानों ने फसल बीमा योजना के तहत 25 प्रतिशत अग्रिम राशि तत्काल मंजूर करने की मांग की है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में अकाल जैसी स्थिति घोषित कर बीमा भरपाई देने, पशुओं के लिए चारा छावनियां शुरू करने और राजस्व विभाग के माध्यम से बारिश के लंबे अंतराल का पंचनामा कराने की मांग की गई है।

अच्छी बारिश की उम्मीद पर टिकी नजरें

फिलहाल किसान और आम नागरिक दोनों आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों के साथ-साथ पेयजल और पशुओं के चारे की समस्या भी गंभीर हो सकती है। अब किसानों की नजरें आने वाले दिनों में होने वाली बारिश पर टिकी हैं।

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