अकोला पर जलसंकट की आहट: काटेपूर्णा बांध में केवल 34 प्रश जल शेष, बाष्पीभवन से तेजी से घट रहा जलस्तर
Akola Water Crisis: अकोला की जीवनरेखा काटेपूर्णा बांध का जलस्तर चिंताजनक रूप से 34.32% तक गिर गया है। बढ़ते तापमान और तेज बाष्पीभवन के कारण अकोला शहर और 64 गांवों पर भीषण जलसंकट का खतरा मंडरा रहा है।
Akola Drinking Water News: अकोला शहर में महान गांव में स्थित काटेपूर्णा बांध से नलों द्वारा जलापूर्ति की जाती है। इस समय काटेपूर्णा बांध का जलस्तर चिंता जनक रूप से घट गया है। इस समय काटेपूर्णा बांध में सिर्फ 34.32 प्रश जलसंचय शेष है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9 प्रश कम है। अकोला का तापमान 46.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने से बाष्पीभवन की गति तेज हो गई है और स्थिति और गंभीर होती जा रही है। देखा जा रहा है कि आए दिन काटेपूर्णा बांध का पानी कम होता जा रहा है।
अकोला शहर के साथसाथ बोरगांव मंजू, मूर्तिजापुर, एमआईडीसी और खांबोराउन्नई योजना के अंतर्गत आने वाले 64 गाँवों की जीवनरेखा यही काटेपूर्णा बांध है। पिछले वर्ष पर्याप्त वर्षा होने से बांध शत प्रतिशत भर गया था और रबी मौसम के लिए 6,700 हेक्टेयर क्षेत्र को पानी दिया गया था। लेकिन अब 31 मार्च से सिचाई के लिए पानी बंद कर दिया गया है और शेष जलसंचय केवल पेयजल के लिए आरक्षित किया गया है। बाक्सतकनीकी स्थिति वर्तमान में बांध का जलस्तर 342.70 मीटर है और उपयोगी पानी केवल 29.638 द.ल.घ.मी. रह गया है।
बांध का पानी अब मुख्य वक्रद्वार के नीचे चला गया है। पाँच वाल्वों में से एक वाल्व पूरी तरह खुला दिखाई दे रहा है, जबकि केवल चार वाल्व पानी के नीचे हैं। खांबोराउन्नई योजना के लिए हर दस दिन में नदीपात्र में पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे जल स्तर तेजी से कम हो रहा है। समय पर बारिश न हुई तो पाइंटरबिगड़ सकती है स्थितियह उल्लेखनीय है कि, अकोला का तापमान लगातार बढ़ रहा है और बाष्पीभवन से जलस्तर तेजी से घट रहा है।
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यदि आनेवाले समय में समय पर बारिश नहीं हुई या कम रही तो जलसंकट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। प्रशासन ने नागरिकों से पानी बचाने और सावधानीपूर्वक उपयोग करने की अपील की है।
कोटअधिकारी कर रहे निगरानी उप अभियंता आदित्य कासार, संदीप नेमाडे और मनोज पाठक स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। उप कार्यकारी अकोला शहर को हर पाँचवें दिन पानी की आपूर्ति की जा रही है। नागरिकों को चाहिए कि वे पानी का अपव्यय न करें और इसे बचाकर उपयोग करें। भविष्य में जलसंकट से बचने के लिए मितव्ययिता ही एकमात्र विकल्प है।चिन्मय वाकोडे, कार्यकारी अभियंता, अकोला।
