Akola Water Crisis: जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजना अकोला जिले में ठप पड़ती नजर आ रही है। पिछले दो वर्षों से ठेकेदारों को भुगतान नहीं मिलने के कारण कई तहसीलों में कार्य बंद हो चुके हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भीषण जलसंकट उत्पन्न हो गया है।
हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना की जमीनी हकीकत चिंताजनक है। गर्मी के मौसम में हालात और बिगड़ते जा रहे हैं, जहां नागरिकों को पानी के लिए जूझना पड़ रहा है।
बार्शीटाकली तहसील के पिंजर गांव के समीप निहिदा क्षेत्र में स्थिति गंभीर बनी हुई है। यहां ठेकेदार द्वारा प्रारंभ से ही घटिया स्तर का कार्य किए जाने के आरोप हैं, जिसे बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया। जानकारी के अनुसार, काम पूर्ण किए बिना ही बड़ी राशि निकाली गई, जबकि संबंधित ठेकेदार अब पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिला परिषद जलापूर्ति विभाग और जल जीवन मिशन के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में मौन साधे हुए हैं।
अब तक न तो किसी प्रकार की जांच शुरू हुई है और न ही दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई है। प्रशासन की निष्क्रियता से पूरे मामले पर संदेह के बादल मंडरा रहे हैं।
दूसरी ओर, कई ठेकेदारों ने भुगतान के लिए आंदोलन, निवेदन और उपोषण का सहारा लिया, लेकिन उन्हें भी बकाया राशि नहीं मिली। परिणामस्वरूप उनके कार्य भी बंद हो गए हैं।
स्थिति यह बन गई है कि जहां निकृष्ट कार्य करने वालों पर कार्रवाई नहीं हो रही, वहीं ईमानदारी से काम करने वाले ठेकेदारों को भी भुगतान नहीं मिल रहा।
इन परिस्थितियों के चलते आम नागरिकों के मूलभूत अधिकार—पेयजल—पर संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने राज्य सरकार और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
मांग की जा रही है कि बकाया भुगतान जल्द किया जाए, निकृष्ट कार्यों की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो तथा अधूरे प्रकल्पों को शीघ्र पूरा कराया जाए।
अन्यथा, आने वाले दिनों में जनआक्रोश तेज होने की संभावना जताई जा रही है।