विकास या विनाश? हाईवे के नाम पर कटे विशाल वृक्ष, अकोला में पर्यावरण संकट के लिए कौन जिम्मेदार?

Akola Highway Widening: अकोला में हाईवे चौड़ीकरण की भेंट चढ़ी हरियाली। हजारों पेड़ों की कटाई से बढ़ा तापमान, विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की उठी मांग। जानें विशेषज्ञों की राय।
Highway widening in Akola leads to massive tree felling, causing a rise in local temperatures. Experts and MLAs call for urgent plantation and maintenance strategies.
हाईवे चौड़ाइकरण में हरियाली खत्म (सौजन्य-नवभारत)
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Akola Environmental Crisis: अकोला जिले में पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ाइकरण और नवीनीकरण बड़े पैमाने पर किया गया है। नई सीमेंट की चौड़ी सड़कें तैयार हो चुकी हैं, लेकिन इस विकास कार्य से सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि हजारों पेड़ काट दिए गए। कभी इन सड़कों के दोनों ओर नीम, गुलमोहर और केसिया जैसे विशाल वृक्ष दिखाई देते थे, जो अब पूरी तरह गायब हो चुके हैं।

बालापुर रोड और मुर्तिजापुर रोड पर नीम के घने पेड़ थे, जो धीरे-धीरे सड़क चौडाइकरण के चलते काटे गए। पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को गहरी हानि पहुंची है। गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ गया है और ठंड के दिनों में भी दोपहर को तेज गर्मी महसूस होती है।

नहीं देते पोषण की ओर ध्यान

पौधारोपण होता भी है तो पौधों के पोषण की ओर ठीक से ध्यान नहीं दिया जाता है। पेड़ों की संख्या घटने से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ा है और आने वाले वर्षों में गर्मी का असर और अधिक बढ़ने की आशंका है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर चौड़ाइकरण से यातायात की सुविधा तो बढ़ी है, लेकिन हरियाली का अभाव अब साफ दिखाई देता है।

पहले रहती थी छाया

  • पहले इन मार्गों पर चलते समय पेड़ों की छाया और ठंडी हवा का अनुभव होता था, वहीं अब केवल गर्मी और धूल का सामना करना पड़ता है।
  • विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। समय रहते पौधारोपण और संरक्षण की ठोस योजना बनाए जाना आवश्यक है।
  • अब ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में तापमान और प्रदूषण की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

पानी की व्यवस्था जरूरी : खंडेलवाल

इस बारे में वि.प. के विधायक वसंत खंडेलवाल ने कहा कि, कुछ समय पूर्व विधायक निधि से शिवर ग्राम से लेकर रिधोरा तक वृक्षारोपण किया गया था लेकिन कई पेड़ पानी न मिलने के कारण सूख गए थे। उन्होंने कहा कि आनेवाले जून, जुलाई माह में हाईवे पर और भी वृक्षारोपण करना है लेकिन डा. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ या मनपा ने मेंटनेंस और पानी की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

हाईवे पर किया गया है वृक्षारोपण : मिश्रा

इस बारे में बातचीत करने पर ईगल इन्फ्रा के संचालक रामप्रकाश मिश्रा ने बताया कि, मलकापुर से लेकर अमरावती तक हाईवे पर सन 2023 में विविध प्रकार के पेड़ लगाए गए थे। उसमें से काफी पेड़ अभी भी लगे हुए हैं। हमारी कोशिश रहती है वृक्षारोपण करने की। पेड़ लगाने के बाद उसका पोषण और पानी की जिम्मेदारी भी संबंधित विभाग ने लेनी चाहिए।

  • नवभारत लाइव पर अकोला से अरुण कुमार वालोकार की रिपोर्ट
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