

Akola DJ Decibel Control : अकोला में गणेशोत्सव के दौरान DJ और ध्वनि को लेकर शिवसेना उपनेता गोपीकिसन बाजोरिया ने पुलिस-प्रशासन से स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि DJ पर रोक लगाने या बार-बार चेतावनी देने के बजाय तकनीकी व्यवस्था के जरिए ध्वनि को निर्धारित डेसिबल सीमा में नियंत्रित किया जाना चाहिए।
गणेशोत्सव के दौरान DJ और ध्वनि को लेकर होने वाले विवाद के बीच शिवसेना उपनेता गोपीकिसन बाजोरिया ने पुलिस प्रशासन के सामने एक अलग समाधान रखा है। उनका कहना है कि सार्वजनिक गणेश मंडलों को बार-बार ध्वनि सीमा और DJ को लेकर चेतावनी देने के बजाय प्रशासन को ऐसी स्थायी तकनीकी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे DJ की आवाज निर्धारित डेसिबल सीमा में ही रहे।
बाजोरिया के अनुसार, वर्तमान तकनीक के दौर में यह संभव है। इससे ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन भी कराया जा सकता है और पुलिस प्रशासन तथा गणेश मंडलों के बीच अनावश्यक टकराव की स्थिति भी पैदा नहीं होगी।
गोपीकिसन बाजोरिया ने कहा कि हिंदू त्योहारों के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से आयोजकों को ध्वनि सीमा और DJ को लेकर बार-बार निर्देश दिए जाते हैं। उनका सुझाव है कि पुलिस साउंड इंजीनियरों की मदद से शहर में इस्तेमाल होने वाले DJ की ध्वनि को निर्धारित सीमा में नियंत्रित करने की व्यवस्था करे।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह एसटी महामंडल ने बसों की गति निर्धारित करने के लिए तकनीकी व्यवस्था की है, उसी तरह DJ की आवाज को भी तकनीक के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।
गोपीकिसन बाजोरिया ने कहा कि उत्सवों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए कानून और नियम पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी अमल जरूरी है। केवल छोटे गणेश मंडलों पर कार्रवाई करने या उन्हें चेतावनी देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
उन्होंने अतिरिक्त डेसिबल उत्पन्न करने वाले DJ (डिस्क जॉकी) इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माताओं और संबंधित स्तर पर भी कार्रवाई की जरूरत बताई। उनके अनुसार, उत्सवों के दौरान ध्वनि के डेसिबल की जांच तो की जाती है, लेकिन आगे कार्रवाई नहीं होने पर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी अंकुश नहीं लगता।
बाजोरिया ने कहा कि हाल में तहसील स्तर पर हुई शांतता समिति की बैठकों में भी मुख्य रूप से DJ को लेकर सावधानी बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं और इसकी पूरी जिम्मेदारी अकोला गणेशोत्सव मंडलों पर डाल दी जाती है।
उन्होंने प्रशासन से DJ के साथ-साथ प्लास्टिक सजावट और प्रदूषण जैसी समस्याओं के भी स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाने की मांग की। उनका कहना है कि तकनीकी और प्रभावी व्यवस्था के जरिए नियमों का पालन कराया जाए, ताकि उत्सव का माहौल भी बना रहे और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण भी हो सके।