

Akola Drought Declaration Demand: बारिश में तीन सप्ताह से अधिक समय से बने लंबे अंतराल के चलते अकोला जिले में सूखे जैसी गंभीर स्थिति निर्माण हो गई है। सोयाबीन, मूंग और उड़द जैसी फसलें फूल एवं फलियां लगने की निर्णायक अवस्था में हैं, जबकि कपास, तुअर और अंतरफसलें वृद्धि की अवस्था में हैं। बारिश के अभाव में खेतों की नमी तेजी से कम होने से फसलों पर जल तनाव बढ़ गया है। इस स्थिति को देखते हुए जिले में तत्काल सूखा घोषित कर किसानों को राहत देने की मांग क्रांतिकारी किसान संगठन ने की है। इस संबंध में संगठन की ओर से शुक्रवार को जिलाधिकारी वर्षा मीणा को निवेदन सौंपा गया।
निवेदन में कहा गया है कि बारिश नहीं होने से विशेष रूप से सोयाबीन की फसल पर गंभीर असर पड़ रहा है। फूल झड़ने, फलियों की संख्या कम होने तथा दाने नहीं भरने का खतरा बढ़ गया है। यदि आगामी कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका है, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। संगठन ने कहा कि मौजूदा स्थिति अब केवल बारिश के अंतराल तक सीमित नहीं है, बल्कि गंभीर सूखे जैसी परिस्थिति बनती जा रही है।
इसलिए सरकार को तत्काल किसानों के खेतों तक पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए। फसल पूरी तरह बर्बाद होने के बाद पंचनामा करने के बजाय अभी से खेतों का निरीक्षण कर तत्काल राहत घोषित की जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं होने पर क्रांतिकारी किसान संगठन की ओर से तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस अवसर पर संगठन के जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर गवली, जिला उपाध्यक्ष संजय सोनोन, अकोला तहसील अध्यक्ष मंगेश गावंडे, पूर्णाजी खोडके, सुनील इंगले, रमेश चिंचे, शंकर सनगाडे सहित किसान, संगठन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।
अकोला जिले में तत्काल सूखा घोषित किया जाए।
गांव एवं खेत स्तर पर फसलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर पंचनामा किया जाए।
महंगाई और बढ़ी कृषि लागत को ध्यान में रखते हुए प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख रु.तत्काल मुआवजा दिया जाए।
पात्र किसानों को फसल बीमा का पूर्ण एवं न्यायसंगत लाभ दिलाया जाए।
सूखे की स्थिति को देखते हुए किसानों को कर्जमाफी का लाभ दिया जाए।
पशुओं के लिए चारे और पीने के पानी की तत्काल व्यवस्था की जाए।