Akola Police ने शुरू की हाई-टेक योजनाएं, सीसीटीवी से लेकर QR कोड तक

Akola District Police मे हाल ही में 3 नई योजनाओं की शुरुआत की। जिसका उद्घाटन राज्य के कामगार मंत्री और अकोला जिले के पालकमंत्री एड आकाश फुंडकर के हाथों हुआ है।
Akola District Police मे हाल ही में 3 नई योजनाओं की शुरुआत की। जिसका उद्घाटन राज्य के कामगार मंत्री और अकोला जिले के पालकमंत्री एड आकाश फुंडकर के हाथों हुआ है।
अकोला जिला पुलिस (सौ. सोशल मीडिया )
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Akola News In Hindi: अकोला जिला पुलिस ने तीन नई योजनाओं की शुरुआत की है। कमांड एंड कंट्रोल कक्ष, त्रिनेत्र योजना और रक्षा योजना। इन योजनाओं का उद्घाटन राज्य के कामगार मंत्री और अकोला जिले के पालकमंत्री एड आकाश फुंडकर ने किया।

उन्होंने कहा कि ये योजनाएं पूरे महाराष्ट्र के लिए मॉडल और मार्गदर्शक साबित होंगी। इस अवसर पर जिलाधिकारी वर्षा मीणा, पुलिस अधीक्षक अर्चित चांडक, अपर पुलिस अधीक्षक सी। के। रेड्डी, आईटी विशेषज्ञ किशन पनपलिया, मनीष करंदीकर, स्थानीय अपराध शाखा प्रमुख शंकर शेलके सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पालकमंत्री फुंडकर ने कहा कि यह योजना पूरे राज्य में लागू करने के लिए मुख्यमंत्री से अनुरोध किया जाएगा। उन्होंने इसे राज्य के लिए पथदर्शी प्रकल्प बताया। यह पहल अकोला पुलिस की ओर से स्मार्ट, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित पुलिसिंग की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो राज्य भर में अनुकरणीय साबित हो सकता है। इस अवसर पर विभिन्न मामलों में सफल जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया।

कमांड एंड कंट्रोल कक्ष और सीसीटीवी प्रणाली

शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों की निगरानी पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बने कमांड एंड कंट्रोल कक्ष से की जाएगी। इससे शहर में अपराधों पर नजर रखना और तुरंत कार्रवाई करना आसान होगा।

रक्षा योजना की विशेषताएं

हर पुलिस स्टेशन को QR कोड आधारित प्रणाली दी गई है। इसके जरिए नागरिक पुलिसकर्मियों के व्यवहार या समस्या के समाधान न होने पर गोपनीय शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह प्रणाली नागरिकों को केंद्र में रखकर सेवा देने पर जोर देती है। शिकायतकर्ता का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।

त्रिनेत्र योजना की कार्यप्रणाली

इस योजना में बार-बार अपराध करने वाले व्यक्तियों का डेटा एकत्र किया जाएगा। एफआईआर, बॉन्ड और अन्य दस्तावेजों को तकनीक की मदद से प्रोसेस किया जाएगा। इससे अपराधियों पर नजर रखना और भविष्य में अपराध रोकना संभव होगा। साथ ही, सुधार की इच्छा रखने वाले अपराधियों का पुनर्वसन भी किया जा सकेगा।

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