

रजपूतपुरा परिसर में रविवार सुबह हुआ हादसा।
स्थानीय नागरिकों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला।
तीन बच्चियों के पैरों में चोटें आईं, प्राथमिक उपचार के बाद घर लौटीं।
पश्चिम जोन में 64 जर्जर इमारतों के मालिकों को नोटिस।
मनपा ने ढही इमारत के खतरनाक हिस्से को हटाया।
Akola Municipal Corporation Building Collapse: अकोला के रजपूतपुरा परिसर में रविवार सुबह एक जर्जर इमारत का हिस्सा अचानक ढहने से अफरा-तफरी मच गई। हादसे के समय इमारत में रह रहा परिवार इसकी चपेट में आ गया। स्थानीय नागरिकों ने तत्परता दिखाते हुए मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकाला। तीन बच्चियां घायल हुईं, लेकिन तीन वर्षीय प्रणव और उसकी मां सुरक्षित बच गए।
जानकारी के अनुसार, प्रकाश यादव और अन्य लोगों के स्वामित्व वाली इस पुरानी इमारत में वैभव पांडे का परिवार किराये पर रहता है। परिवार के सदस्य रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे, तभी अचानक तेज आवाज के साथ दीवार और छत का कुछ हिस्सा ढह गया। देखते ही देखते आसपास धूल फैल गई और लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।
हादसे के बाद स्थानीय नागरिकों और युवकों ने तुरंत मलबा हटाने का काम शुरू किया। उनकी मदद से दबे हुए लोगों को बाहर निकाला गया। घटना में तीन बच्चियों-रिमझिम, रिया, नैना और रौनक में से तीन बच्चियों-के पैरों में चोटें आने की जानकारी दी गई है। घायल बच्चियों को अकोला शहर नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत ठीक होने पर उन्हें घर भेज दिया गया।
तीन वर्षीय प्रणव और उसकी मां सुरक्षित बच गए। परिवार के सदस्यों के सुरक्षित निकलने से परिसर के लोगों ने राहत की सांस ली।
घटना की प्राथमिक जानकारी मिलते ही महानगरपालिका प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। मनपा आयुक्त डॉ. सुनील लहाने के आदेश पर अतिरिक्त आयुक्त सुमेध अलोणे और उपायुक्त गणेश शहाणे के मार्गदर्शन में इमारत के कमजोर और खतरनाक हिस्से को हटाया गया। इस दौरान पूर्व क्षेत्र के सहायक आयुक्त राजेश सरप भी उपस्थित रहे।
कार्रवाई के समय प्रशांत राजुरकर, मनीष कथले, चंद्रशेखर इंगले, प्रवीण मिश्रा, राहुल राऊत और अक्षय बोर्डे सहित अन्य कर्मचारी मौजूद थे।
मनपा के अनुसार, पश्चिम जोन क्षेत्र में 64 जर्जर इमारतें चिन्हित की गई हैं। संबंधित इमारतों के मालिकों को पहले ही नोटिस जारी कर इमारतें खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्षेत्रीय अधिकारी राजेश सरप ने स्पष्ट किया कि नोटिस के बावजूद इमारत खाली नहीं करने की स्थिति में मकान मालिकों की जिम्मेदारी होगी। इस घटना ने शहर में जर्जर इमारतों की सुरक्षा और समय रहते कार्रवाई की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।