Akola News: अकोला में चेक बाउंस मामले में फैसला, दंपती को 1-1 साल की सजा और 10.06 लाख का जुर्माना

Cheque Bounce Case: अकोला न्यायालय ने चेक बाउंस मामले में आरोपी नीलेश वोरा और सोनल वोरा को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 1 वर्ष के कठोर कारावास और 10.06 लाख रुपये के दंड की सजा सुनाई है।
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चेक बाउंस मामला- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Akola Court Verdict: 5 लाख 3 हजार के धनादेश अनादर मामले में अकोला के अतिरिक्त न्यायदंडाधिकारी न्यायालय ने महत्त्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आरोपी पति पत्नी को 1 वर्ष का कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही धनादेश राशि के दोगुने यानी 10 लाख 6 हजार का दंड ठोका गया है। यह संपूर्ण राशि शिकायतकर्ता पतसंस्था को नुकसानभरपाई के रूप में देने का आदेश दिया गया है।

शिकायतकर्ता महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, 1960 अंतर्गत पंजीकृत पतसंस्था है। संस्था की अधिकृत प्रतिनिधि ज्योति गजभी ने न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी नीलेश वोरा ने संस्था से 5 लाख का कर्ज लिया था। वापसी हेतु उन्होंने 7 मार्च 2024 को 5,03,000 का धनादेश दिया।

चेक अनादर मामले में न्यायालय की कार्रवाई

बैंक में प्रस्तुत करने पर खाते में पर्याप्त राशि न होने से धनादेश अनादरित होकर लौट आया। संस्था ने 21 मार्च 2024 को दोनों आरोपियों को कानूनी नोटिस भेजकर 15 दिन में राशि जमा करने की मांग की। निर्धारित समय में भुगतान न होने पर परक्राम्य दस्तावेज अधिनियम, 1881 की धारा 138 अंतर्गत फौजदारी शिकायत दर्ज की गई।

नागरिकों की परेशानी

प्रमाणपत्र न मिलने से शासकीय कामकाज, स्कूल प्रवेश और अन्य तात्कालिक कार्यों में नागरिकों को बार-बार महापालिका के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। प्रशासन अब पुराने वैद्यकीय स्वास्थ्य अधिकारियों का पता लगाकर उनसे लंबित पंजीयन पर हस्ताक्षर और सील प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है। वर्षों की इस देरी का खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

प्रशासन की प्रमाणपत्र वितरण तिक्रिया

उपायुक्त विजय पारतवार ने बताया कि महापालिका ने प्रमाणपत्र वितरण की नियमावली कड़ी कर दी है। अस्पताल से प्राप्त फॉर्म पर तत्कालीन उपनिबंधक की हस्ताक्षर सुनिश्चित की जा रही है। सभी लंबित पंजीयन की खोज जारी है ताकि नागरिकों को प्रमाणपत्र प्राप्त करने में आगे कोई अड़चन न आए।

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