अकोला की बार्शीटाकली पंचायत समिति में 5 लाख का घोटाला, जिला परिषद ने शुरू की जांच
Akola News: अकोला जिले की बार्शीटाकली पंचायत समिति में करीब 5 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा है। शिकायत के बाद जिला परिषद ने जांच समिति गठित की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के संकेत हैं।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Akola Barshitakli Panchayat Samiti Scam:अकोला जिले की बार्शीटाकली पंचायत समिति में कथित तौर पर करीब पांच लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता होने का मामला उजागर हुआ है। इस संबंध में विजय देशमुख द्वारा 4 सितंबर 2025 को जिला प्रशासन के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला परिषद, अकोला ने 4 नवंबर 2025 को एक विशेष जांच समिति का गठन किया।
जांच समिति ने तय की आगे की कार्यवाही
जांच समिति द्वारा 19 दिसंबर 2025 को पत्र जारी कर मामले की विस्तृत जांच की प्रक्रिया तय की गई। इसके तहत शिकायतकर्ता विजय देशमुख को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला परिषद, अकोला के उपमुख्य लेखा एवं वित्त अधिकारी के कार्यालय में समिति के समक्ष उपस्थित होकर सभी संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करें। यह जांच समिति उपमुख्य लेखा एवं वित्त अधिकारी की अध्यक्षता में कार्य करेगी।
दरपत्रक के बिना किया गया भुगतान
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंचायत समिति द्वारा कंप्यूटर, प्रिंटर, कार्यालयीन रंगरोगन तथा वाई-फाई उपकरणों की खरीद और कार्यों के लिए कोई भी अधिकृत दरपत्रक (कोटेशन) नहीं मंगवाया गया। इसके बावजूद सीधे ठेकेदारों और काम करने वाले व्यक्तियों के बैंक खातों में राशि जमा कर दी गई।
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भंडार नोंदवही में प्रविष्टि नहीं
आरोपों के अनुसार, जिन सामग्रियों की खरीद दिखाई गई है, उनकी प्रविष्टि अब तक भंडार नोंदवही क्रमांक 32 में दर्ज नहीं की गई। इसके अलावा, जिन भुगतानों को स्वीकृत किया गया, उनके साथ कोई वैध बिल या दस्तावेज संलग्न नहीं थे, जिससे वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिस अवधि में कथित भुगतान किए गए, उस दौरान भंडारपाल तीन महीने की छुट्टी पर था। इसके बावजूद समूह विकास अधिकारी और संबंधित कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से भुगतान प्रक्रिया पूरी की।
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दोष सिद्ध होने पर सख्त कार्रवाई संभव
इस पूरे प्रकरण से पंचायत समिति के वित्तीय लेन-देन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। जिला परिषद सूत्रों के अनुसार, जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
