Akola News: ग्रामीण भागों में इन दिनों घरेलू गैस सिलेंडर की तीव्र कमी ने आमजनजीवन को प्रभावित कर दिया है. बुकिंग के बावजूद सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे, जिसके चलते पोषण आहार तक चूल्हे पर पकाया जा रहा है. बालापुर तहसील के लोहारा गांव का दृश्य यही कहानी बयां करता है.
महंगाई की मार अब सीधे रसोई तक पहुंच गई है. कई परिवारों को ऊंचे दामों पर गैस खरीदनी पड़ रही है, वहीं सिलेंडर भरने के लिए एकमुश्त बड़ी रकम जुटाना भी मुश्किल हो रहा है. इस कारण ग्रामीण महिलाएं महंगे गैस की बजाय चूल्हे पर ही भोजन बनाने को विवश हैं. 2016 में केंद्र सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को धुएं से मुक्ति और प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की थी.
इस योजना से बड़ी संख्या में गरीब परिवारों तक गैस सिलेंडर पहुंचे और महिलाओं को राहत मिली. लेकिन पिछले कुछ दिनों से सिलेंडर की कमी और लगातार बढ़ते दामों ने फिर पुरानी स्थिति पैदा कर दी है. महिलाएं एक बार फिर चूल्हे पर खाना पकाती दिखाई दे रही हैं. राशन पर मिलने वाला रॉकेल बंद हो चुका है और गैस दरों में वृद्धि से महिलाओं के सामने कोई विकल्प नहीं बचा है.
गैस दरवृद्धि और सिलेंडर की कमी से गृहिणियों को घरेलू बजट संभालना कठिन हो गया है. इस स्थिति का असर ग्रामीण स्कूलों पर भी पड़ा है. कई विद्यालयों में छात्रों को पोषण आहार नहीं मिल पा रहा है. कुछ स्कूलों में मजबूरन चूल्हे जलाकर बच्चों को भोजन दिया जा रहा है. पहले छात्रों को गैस पर बनी खिचड़ी दी जाती थी, लेकिन सिलेंडर न मिलने से अब स्कूल परिसर में चूल्हे पर ही खिचड़ी पकाकर परोसी जा रही है.