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अकोला में 774 ई-रिक्शा दौड़ रहे सड़कों पर, यात्रियों और चालकों की पहली पसंद बना यह इको-फ्रेंडली वाहन

Akola 774 E Rickshaw: अकोला शहर में अब 774 ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं। कम खर्च, आसान परमिट और पर्यावरण अनुकूल होने के कारण यह वाहन यात्रियों और चालकों दोनों की पहली पसंद बन गया है।

  • Written By: केतकी मोडक
Updated On: Jun 26, 2026 | 11:51 AM

774 e-Rickshaw फाईल फोटो (सोर्स - सोशल मीडिया)

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Electric Rickshaw Employment Opportunity Akola: आसान परमिट व्यवस्था और ई-रिक्शा की बढ़ती उपलब्धता के कारण पिछले कुछ वर्षों में अकोला शहर में ई-रिक्शा की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कम खर्च, सुविधाजनक संचालन और पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण यात्रियों के साथ-साथ वाहन चालकों की भी पहली पसंद ई-रिक्शा बनते जा रहे हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में अकोला शहर में 515 मालवाहक ई-रिक्शा और 259 यात्री ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। इस प्रकार कुल 774 ई-रिक्शा शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। देश भर में भी इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में ई-रिक्शा की संख्या 18 लाख से अधिक हो चुकी है और देश, दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बाजार बन गया है। कम परिचालन खर्च, पेट्रोल-डीजल की तुलना में बेहद सस्ता रखरखाव तथा केंद्र व राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं इसका प्रमुख कारण मानी जा रही हैं।

दूसरी ओर, अकोला शहर की बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या और प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण के कारण कई स्थानों पर यातायात जाम की समस्या भी सामने आ रही है। ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या से कुछ व्यस्त क्षेत्रों में यातायात का दबाव और अधिक बढ़ा है।

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नियमों का पालन जरूरी

उप प्रादेशिक परिवहन अधिकारी (DY RTO) रविंद्र भुयार ने कहा है कि “शहर में ई-वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है और ई-रिक्शा की मांग भी काफी अच्छी है। ये वाहन पर्यावरण के अनुकूल हैं, लेकिन सभी ई-रिक्शाओं का विधिवत पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) होना और चालकों द्वारा यातायात नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।”

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ई-रिक्शा से बेरोजगारों को मिला रोजगार

पुराना शहर निवासी प्रतीक डवले ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से ई-रिक्शा ही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन बना हुआ है। इससे उन्हें नियमित रोजगार मिलता है और इसके रखरखाव पर भी बहुत कम खर्च आता है।

वहीं, गोपाल निवाणे ने कहा कि वे पिछले चार-पांच वर्षों से ई-रिक्शा चला रहे हैं। शहर के भीतर इसका संचालन बेहद आसान है, लेकिन आसपास के ग्रामीण इलाकों की यात्रा के दौरान चार्जिंग सुविधाओं की कमी जरूर महसूस होती है।

774 e rickshaw passengers first choice employment traffic akola

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Published On: Jun 26, 2026 | 11:51 AM

Topics:  

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