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‘भारत के पुनर्जागरण में साईं बाबा का योगदान’, शिरडी मंदिर में दर्शन के बाद RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शिरडी में साईं बाबा समाधि मंदिर के दर्शन किए। दर्शन के बाद भागवत ने मंदिर की आगंतुक पुस्तिका में लिखा कि शिरडी के साईं बाबा एक दिव्य योजना का हिस्सा थे।

  • By आकाश मसने
Updated On: May 19, 2025 | 01:40 PM

शिरडी के साईं बाबा मंदिर में दर्शन करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (फोटो नवभारत)

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अहिल्यानगर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शिरडी में साईं बाबा समाधि मंदिर के दर्शन किए। मंदिर में उन्होंने पद्य पूजा की और शिरडी माझे पंढरपुर आरती में भाग लिया। उन्होंने समाधि पर भगवा शॉल भी चढ़ाया। साईं संस्थान की ओर से सीईओ गोरक्ष गाडिलकर ने उन्हें साईं की मूर्ति, साईं सच्चरित्र की एक प्रति, पवित्र भस्म (विभूति) और शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

दर्शन के बाद भागवत ने मंदिर की आगंतुक पुस्तिका में अत्यंत सम्मानपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि शिरडी के साईं बाबा एक दिव्य योजना का हिस्सा थे, जिसने 1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारत के पुनर्जागरण की नींव रखी।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि देश भर में समाज के आध्यात्मिक और व्यावहारिक जागरण के माध्यम से, उनकी तपस्या उनके भौतिक निधन के बाद भी लोगों का मार्गदर्शन करती रहती है।

इस दौरान डिप्टी सीईओ भीमराज दराडे, आरएसएस के जिला संघचालक किशोर निर्मल, जिला कार्यवाह दीपक जोंधले, संयुक्त जिला कार्यवाह गोपी परदेशी (कुमावत) और संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी दीपक लोखंडे भी मौजूद थे।

भागवत ने की मंदिर प्रशासन की प्रशंसा

मंदिर प्रशासन की प्रशंसा करते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि मैं साईं बाबा समाधि मंदिर के दैनिक संचालन, विकास और उत्कृष्ट प्रबंधन में शामिल सभी लोगों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने ऐतिहासिक द्वारकामाई का भी दौरा किया, जहां साईं बाबा शिरडी आगमन से लेकर महासमाधि तक रहे थे। वहां उन्होंने बाबा की ऐतिहासिक तस्वीरें देखीं। अपने दौरे के बाद उन्होंने सरला बेट के मुख्य पुजारी रामगिरी महाराज से मुलाकात की।

आरएसएस प्रमुख ने लिखा कि 1857 के विद्रोह में भाग लेने वाले कई स्वतंत्रता सेनानी बाद में भूमिगत हो गए या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्वतंत्रता संग्राम का समर्थन जारी रखने के लिए नई पहचान बना ली। शिरडी के साईं बाबा जैसे दिव्य व्यक्तित्व भी ब्रिटिश संदेह के घेरे में थे और उन पर खुफिया निगरानी रखी जाती थी।

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साईं बाबा की स्वतंत्रता नेता लोकमान्य तिलक से मुलाकात के बाद ब्रिटिश सरकार और अधिक संदिग्ध हो गई लेकिन बाबा के खिलाफ कभी कोई सबूत नहीं मिला। डॉ. भागवत द्वारा आगंतुक पुस्तिका में 1857 के युद्ध का उल्लेख संभवतः एक गहरा अर्थ रखता है जो केवल उन्हें ही पता है।

Rss chief mohan bhagwat visited sai baba temple in shirdi

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Published On: May 19, 2025 | 01:40 PM

Topics:  

  • Ahilyanagar
  • Mohan Bhagwat
  • RSS
  • Shirdi Sai Temple

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