

Sharad Pawar vs Devendra Fadnavis Rahuri: महाराष्ट्र की राजनीति में बारामती और राहुरी विधानसभा उपचुनावों ने सियासी सरगर्मी तेज कर दी है। जहाँ बारामती में अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार की राह आसान दिख रही है, वहीं राहुरी उपचुनाव एक दिलचस्प मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। यह चुनाव दिग्गज विधायक शिवाजीराव कर्डिले के निधन के कारण हो रहा है, जिसमें भाजपा ने उनके बेटे अक्षय कर्डिले को मैदान में उतारा है। आज मुख्यमंत्री की होने वाली भव्य प्रचार सभा अक्षय कर्डिले के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है, क्योंकि सबकी नजरें पूर्व मंत्री प्राजक्त तनपुरे के अगले कदम पर टिकी हैं।
राहुरी के इस चुनावी समीकरण में सबसे बड़ा सवाल प्राजक्त तनपुरे की भूमिका को लेकर है। चर्चा थी कि तनपुरे शरद पवार गुट (NCP-SP) से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मंत्री रविंद्र चव्हाण के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने नामांकन दाखिल नहीं किया। इसके बाद शरद पवार ने गोविंद मोकाटे को अपना उम्मीदवार बनाया। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या प्राजक्त तनपुरे आज मुख्यमंत्री की उपस्थिति में आधिकारिक तौर पर भाजपा का दामन थाम लेंगे या अक्षय कर्डिले को बाहर से समर्थन देंगे?
यदि प्राजक्त तनपुरे भाजपा के पक्ष में खड़े होते हैं, तो यह शरद पवार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका होगा। तनपुरे केवल एक पूर्व मंत्री नहीं हैं, बल्कि राहुरी तालुका की नगरपालिका, बाजार समिति और चीनी कारखानों जैसी प्रमुख संस्थाओं पर उनका मजबूत नियंत्रण है। राहुरी में तनपुरे परिवार का दबदबा चुनाव के नतीजों को पलटने की ताकत रखता है। शरद पवार ने गोविंद मोकाटे को उतारकर अपनी जमीन बचाने की कोशिश की है, लेकिन तनपुरे के बिना उनके लिए यह डगर कठिन नजर आ रही है।
फिलहाल राहुरी की स्थिति भाजपा के लिए अनुकूल दिखाई दे रही है। अक्षय कर्डिले को अपने पिता की सहानुभूति और महायुति की संगठित ताकत का लाभ मिल रहा है। दूसरी ओर, प्राजक्त तनपुरे के कार्यकर्ता फिलहाल असमंजस में हैं। तनपुरे जल्द ही अपने समर्थकों की एक अहम बैठक करने वाले हैं, जिसमें वे अपना रुख स्पष्ट करेंगे। यदि वे भाजपा के पाले में जाते हैं, तो गोविंद मोकाटे और शरद पवार गुट के लिए राहुरी के किले को भेदना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।
उपचुनावों के इस शोर के बीच महाराष्ट्र की सत्ता को लेकर 'भेंडवाल की भविष्यवाणी' ने भी हलचल मचा दी है, जिसमें राजा के बने रहने लेकिन सत्ता संघर्ष जारी रहने की बात कही गई है। राहुरी का यह नतीजा न केवल अक्षय कर्डिले के करियर की दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट कर देगा कि पश्चिमी महाराष्ट्र में शरद पवार की पकड़ कितनी मजबूत बची है। मुख्यमंत्री की आज की सभा के बाद राहुरी के चुनावी आसमान से धुंध छंटने की पूरी उम्मीद है।