प्राजक्त तनपुरे थामेंगे भाजपा का दामन? सुजय विखे पाटिल के बयान से महाराष्ट्र में सियासी भूचाल

Rahuri Assembly Bypoll: राहुरी उपचुनाव से प्राजक्त तनपुरे के पीछे हटने के बाद सुजय विखे पाटिल के 'तीन दादा' वाले बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। क्या शरद गुट को लगेगा बड़ा झटका?
Prajakt Tanpure likely to join bjp Sujay Vikhe-Patil Statement
प्राजक्त तनपुरे व सुजय विखे पाटिल (सोशल मीडिया)
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Sujay Vikhe Patil On Prajakt Tanpure: महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय बारामती और राहुरी विधानसभा उपचुनावों को लेकर पारा चढ़ा हुआ है। लेकिन अहिल्यानगर के राहुरी का चुनावी दंगल अब एक नई करवट लेता दिख रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री प्राजक्त तनपुरे द्वारा आखिरी समय में नामांकन वापस लेने के फैसले ने सबको चौंका दिया था। अब इस घटनाक्रम में भाजपा नेता सुजय विखे पाटिल के एक ताजा बयान ने आग में घी डालने का काम किया है।

सुजय विखे पाटिल ने किया बड़ा दावा

एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सुजय विखे पाटिल ने संकेत दिया कि तनपुरे जल्द ही भाजपा का हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि अब किसी भी खेत के बांध पर जाओ, तो सिर्फ 'कमल' ही दिखाई देगा। अब कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अब बीजेपी में तीन-तीन ‘दादा’ होंगे- अक्षय दादा (कर्दले), प्राजक्त दादा और सुजय दादा। विखे ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में कई लोग समूह में भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

CM फडणवीस का फोन और विखे पाटिल की मुलाकात

राहुरी उपचुनाव के नामांकन के अंतिम दिन जो कुछ हुआ, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था। सूत्रों के अनुसार, प्राजक्त तनपुरे के नाम वापस लेने से ठीक पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण और पालकमंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने उनसे लंबी चर्चा की थी। चर्चा तो यह भी है कि खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तनपुरे से फोन पर बात की थी। इस हाई-प्रोफाइल हस्तक्षेप के तुरंत बाद तनपुरे ने मैदान छोड़ दिया, जिससे शरद पवार खेमे में खलबली मच गई।

तनपुरे बोले- विकास के लिए पीछे हटा

अपने फैसले पर सफाई देते हुए शरद पवार गुट के नेता प्राजक्त तनपुरे ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय राहुरी के किसानों, युवाओं और महिलाओं के व्यापक हित में लिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं और मुख्यमंत्री के साथ हुई चर्चा में निर्वाचन क्षेत्र की मांगों पर सकारात्मक आश्वासन मिला है। यह कदम पीछे हटना नहीं, बल्कि विकास की नई लड़ाई की शुरुआत है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तनपुरे का चुनाव न लड़ना और सुजय विखे का उन्हें 'भाजपा का तीसरा दादा' बताना, इस बात की पुष्टि करता है कि शरद पवार का एक और किला ढहने की कगार पर है।

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