संगमनेर में अवैध रेत खनन पर एक्शन, प्रांतीय मजिस्ट्रेट ने पुलिस को लगाई फटकार

Pravara River Sand Mining: संगमनेर में प्रवरा नदी बेसिन से अवैध रेत खनन पर प्रांतीय मजिस्ट्रेट ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस अधिकारियों को फटकार और तत्काल रोक के निर्देश दिए गए है।
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Illegal Sand Mining सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
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Illegal Sand Mining Sangamner: संगमनेर प्रांत के प्रांतीय मजिस्ट्रेट ने संगमनेर तालुका के खांडगांव, संगमनेर खुर्द, कसारा-डुमाला, निंबाले, वाघापुर और अन्य गांवों में प्रवरा नदी बेसिन से बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत खनन पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। बताया जा रहा है कि पुलिस की कथित शह पर यह रेत खनन जारी था।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रांतीय मजिस्ट्रेट ने तुरंत पुलिस अधिकारियों की बैठक बुलाई और उन्हें कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रवरा नदी बेसिन से रेत खनन तत्काल प्रभाव से रोका जाए। बताया जा रहा है कि रेत तस्करों ने फावड़ों की मदद से खुलेआम रेत निकालना शुरू कर दिया था। इस अवैध गतिविधि की खबर सबसे पहले राज्य स्तर के अधिकारियों ने इस पर संज्ञान लिया।

रेत खनन को “टोटल जीरो”

सोमवार (28 तारीख) को आयोजित बैठक में तलाठी, मंडल अधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक कुणाल सोनवणे और पुलिस निरीक्षक समीर बारावकर उपस्थित थे। बैठक में प्रांतीय मजिस्ट्रेट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर उनसे किसी ने जानकारी तक साझा नहीं की। उन्होंने सख्त शब्दों में कहा कि रेत खनन को “टोटल जीरो” किया जाए और सभी संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में रेत की स्थिति की जानकारी देने के निर्देश दिए।

सिटी पुलिस की भूमिका पर सवाल

बैठक के दौरान तलाठियों ने शिकायत की कि कार्रवाई के दौरान गोपनीय जानकारी लीक हो जाती है, जिससे रेत तस्करों को फायदा होता है। यह भी आरोप लगाया गया कि संगमनेर शहर के पुलिस निरीक्षक मामलों में एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल कर रहे हैं। हालांकि, विधायक अमोल खताल द्वारा सख्त रुख अपनाने के बाद कुछ समय के लिए रेत खनन पर नियंत्रण लगा था, लेकिन पिछले दो-तीन दिनों में यह गतिविधि फिर से शुरू हो गई है।

राजनीतिक संरक्षण की चर्चा

यह भी चर्चा है कि कुछ राजनीतिक हस्तियों के संरक्षण में रेत का यह अवैध कारोबार चल रहा है। कहा जा रहा है कि मुनाफे का हिस्सा संबंधित लोगों को देने के वादे पर रेत तस्करों को संरक्षण दिया जा रहा है। इसके चलते निमाज, धांदरफल, संगमनेर खुर्द, खांडगांव और निंबाले जैसे गांवों में बड़े पैमाने पर रेत का उत्खनन और परिवहन हो रहा है।

पुलिस हस्तक्षेप पर सवाल

राजस्व विभाग के पास अवैध रेत परिवहन के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार होने के बावजूद, पुलिस विभाग के कथित हस्तक्षेप के चलते प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। तलाठी और मंडल अधिकारी भी अपेक्षित कदम उठाते नहीं दिख रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।

बैठक के बाद भी जारी रहा खनन

प्रांतीय मजिस्ट्रेट द्वारा सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद खांडगांव, नर्सरी और निमाज क्षेत्रों में रात के समय रेत खनन जारी रहा। इस संबंध में जब प्रांतीय अधिकारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द ही इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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