

Ahilyanagar Municipal Corporation: अहिल्यानगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एम्प्लॉई यूनियन ने शहर में रोजाना होने वाले सफाई कार्य को दो सत्रों (सेशन) में करने के म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन प्रशासन के फैसले को खारिज कर दिया है। यूनियन ने नगर आयुक्त को ज्ञापन देकर मांग की है कि सफाई का काम पहले की तरह एक ही सत्र में जारी रखा जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि इस संबंध में जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो स्वास्थ्य विभाग के सभी सफाई कर्मचारी गुरुवार (9 अप्रैल) से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
यूनियन के अध्यक्ष जितेंद्र सारसर और सचिव आनंद वायकर ने नगर आयुक्त यशवंत डांगे को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा है। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन प्रशासन ने आदेश जारी करते हुए 1 अप्रैल से शहर में सफाई कार्य दो सत्रों में करने के निर्देश दिए थे। इसके अनुसार सफाई का काम सुबह 6 बजे से 10 बजे तक और दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक करने को कहा गया है।
हालांकि यूनियन का कहना है कि यह निर्णय वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर नहीं लिया गया है और इससे कर्मचारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन का कहना है कि कई वर्षों से सफाई कार्य एक ही सत्र में सुचारू रूप से चल रहा था, लेकिन अचानक इसे दो सत्रों में बांटने का निर्णय उचित नहीं है।
यूनियन के पदाधिकारियों ने नगर आयुक्त को दिए बयान में कहा कि अधिकांश सफाई कर्मचारियों को सुबह 5 बजे ही अपने घरों से निकलना पड़ता है। परिवहन सुविधा की कमी के कारण कई कर्मचारियों को पैदल ही काम पर आना पड़ता है। एक शिफ्ट के लिए उन्हें लगभग एक घंटे का सफर करना पड़ता है। ऐसे में सुबह काम करने के बाद दोपहर में फिर से ड्यूटी पर लौटना कर्मचारियों के लिए बेहद कठिन हो रहा है।
यूनियन ने मांग की है कि नगर निगम प्रशासन तुरंत हस्तक्षेप करते हुए सफाई कार्य को एक ही सत्र में जारी रखने का निर्णय ले। अन्यथा 9 अप्रैल से सभी सफाई कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे और इसके लिए प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार होगा।
यूनियन का कहना है कि इन दिनों गर्मी का असर लगातार बढ़ रहा है और दोपहर के समय लू चलने जैसी स्थिति बन जाती है। आम लोग भी दोपहर 12 बजे के बाद घरों से बाहर निकलने से बचते हैं। ऐसे में सफाई कर्मचारियों से दोपहर में काम करवाना उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। हीट स्ट्रोक की संभावना को देखते हुए यूनियन ने आरोप लगाया है कि प्रशासन का यह फैसला कर्मचारियों की जान से खिलवाड़ के समान है।
यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा भी की थी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि डिप्टी कमिश्नर (टैक्स) और अतिरिक्त आयुक्त की उपस्थिति में बैठक कर जल्द निर्णय लिया जाएगा। हालांकि अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।