औरंगाबाद और अहमदनगर के बाद अब पिंपरी-चिंचवड़ के नाम बदने की उठी मांग, लगे फ्लेक्स
- Written By: संतोष मिश्रा
पिंपरी: औरंगाबाद (Aurangabad) और अहमदनगर (Ahmednagar) के बाद अब पुणे (Pune) से सटे पिंपरी-चिंचवड़ (Pimpri-Chinchwad) का नाम बदलने (Name Change) की मांग तेज हो गई है। हालांकि केवल एक संगठन ने इस नाम परिवर्तन की मांग की है। संगठन का कहना है कि अगर सरकार औरंगाबाद और अहमदनगर का नाम बदल सकती है तो पिंपरी-चिंचवड क्यों नहीं? इस मांग को लेकर शहर में 100 से ज्यादा जगहों पर पिंपरी-चिंचवड़ के जीजाऊ नगर (Jijau Nagar) के नाम की मांग को लेकर फ्लेक्स लगाए गए हैं। शहर में इस फ्लेक्स को लेकर विवाद छिड़ गया है।
राज्य के विभिन्न शहरों के नाम बदलने को लेकर इस समय राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद हो रहा है। इस बीच पिंपरी-चिंचवड़ शहर का नाम बदलने की मांग ने खलबली मचा दी है। भक्ति शक्ति प्रतिष्ठान ने पिंपरी-चिंचवड़ शहर का नाम बदलने की मांग की है। भक्ति शक्ति प्रतिष्ठान ने शहर के विभिन्न हिस्सों में फ्लेक्स लगाकर यह मांग की है। यह मांग छत्रपति शिवाजी महाराज के 350वें राज्याभिषेक दिवस के उपलक्ष्य में की गई है। तो क्या पिंपरी चिंचवड़ का नाम बदलने का फैसला करेगी सरकार? इस पर सबका ध्यान है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के मुहाने लेकर एक और नाम बदलने की मांग तेज हो गई है।
हाल ही में बदला गया अहमदनगर का नाम
हाल ही में पुण्यश्लोक अहिल्या देवी होल्कर की जयंती के अवसर पर चौंडी में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अहमदनगर का नाम बदलकर अहिल्या देवी नगर करने की घोषणा की। यहां के नागरिक पिछले कई सालों से शहर का नाम अहिल्या देवी नगर करने की मांग कर रहे हैं। गोपीचंद पाडलकर, विधायक राम शिंदे और अन्य जैसे बीजेपी नेताओं ने यह मांग की थी। धनगर समाज के अन्य नेताओं और संस्थाओं और संगठनों ने भी यह मांग की है। राज्य सरकार ने अंतत: यह मांग मान ली है। जल्द ही इस नामकरण को लेकर सभी प्रक्रिया पूरी कर शहर का नाम बदलकर अहिल्या देवी होल्कर किया जाएगा।
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उद्धव ठाकरे के समय बदला औरंगाबाद का नाम
इससे पहले, जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे, तब औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर कर दिया गया था। हालांकि, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उस कैबिनेट के फैसले को अमान्य बताते हुए औरंगाबाद को छत्रपति संभाजी नगर के रूप में फिर से नामित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। उसके बाद यह मामला कोर्ट में भी गया।
