

MP State Election Commission Action: साल 2022 में हुए नगरीय निकाय चुनाव के दौरान खर्च का ब्यौरा जमा न करने वाले 28 उम्मीदवारों पर राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त कार्रवाई की है। आयोग ने सभी को अयोग्य घोषित कर दिया है। इनमें से 16 उम्मीदवारों पर एक वर्ष के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया है, हालांकि वे 2027 में होने वाले चुनाव में फिर से भाग ले सकेंगे।
आयोग की ओर से 28 अप्रैल को जारी आदेश में कहा गया है कि चुनाव समाप्त होने के बाद सभी उम्मीदवारों के लिए अगस्त 2022 तक अपने चुनावी खर्च का पूरा विवरण देना अनिवार्य था। इसके बावजूद संबंधित उम्मीदवारों ने न तो समय पर जानकारी सौंपी और न ही नोटिस मिलने के बाद सुनवाई में उपस्थित हुए। इसे नियमों का उल्लंघन मानते हुए आयोग ने नगर निगम और नगरपालिका से जुड़े प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की है।
यह कार्रवाई मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के अलग-अलग नगरीय निकायों से जुड़े उम्मीदवारों पर की गई है। इनमें नगरपालिका विदिशा, नगरपालिका गंजबासौदा और नगर परिषद लटेरी व कुरवाई के प्रत्याशी शामिल हैं। एक साल के प्रतिबंध का सामना करने वालों में धीरज सोनी और राहुल रत्नाकर (विदिशा), संजीव शर्मा (गंजबासौदा), नीतू नरेश सक्सेना (लटेरी) के साथ रोशन जहां मजाज मोहम्मद, कमलाबाई बागड़ी, नीतू अहिरवार, इदरीश खान, मंजू तिवारी, मालती जैन, ब्रजेश छोटे, रीना मांझी, मुस्लिम खान, सपना शर्मा और निर्मला अहिरवार (कुरवाई) के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव दीपक सिंह ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना हर उम्मीदवार की जिम्मेदारी है। खर्च का विवरण प्रस्तुत न करना गंभीर उल्लंघन है और ऐसे मामलों में आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि सभी 28 उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित किया गया है, हालांकि उनकी अयोग्यता की अवधि अलग-अलग तय की गई है।
जानकारी के अनुसार, 12 उम्मीदवारों पर लंबी अवधि की अयोग्यता लागू की गई है, जिसके चलते वे 2027 में होने वाले अगले नगरीय निकाय चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। वहीं 16 उम्मीदवारों को एक वर्ष के लिए अयोग्य ठहराया गया है, जिससे वे प्रतिबंध अवधि पूरी होने के बाद चुनाव लड़ने के पात्र बने रहेंगे। मध्य प्रदेश में अगला नगरीय निकाय चुनाव वर्ष 2027 में प्रस्तावित है। ऐसे में जिन उम्मीदवारों पर लंबी अवधि का प्रतिबंध लगाया गया है, उनके लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि एक साल की अयोग्यता झेलने वाले उम्मीदवारों के पास वापसी का अवसर बना रहेगा।