

Madhya Pradesh Milk Capital Announcement: मध्य प्रदेश को मिल्क कैपिटल के रूप में विकसित करने की दिशा में ग्वालियर में बड़ा कदम उठाया गया। सोमवार को मेला ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन में बड़ी संख्या में पशुपालकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मोहन यादव ने योजनाओं का शुभारंभ करते हुए हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र भी वितरित किए।
सम्मेलन में प्रदेशभर से आए 20 हजार से अधिक पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में लखन पटेल समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बड़ी भागीदारी ने यह साफ कर दिया कि डेयरी सेक्टर में लोगों की रुचि तेजी से बढ़ रही है।
सम्मेलन में मध्यप्रदेश सहकारी दुग्ध महासंघ की अहम भूमिका रही। स्टॉल के जरिए दुग्ध संग्रहण, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से जुड़े आधुनिक मॉडल प्रस्तुत किए गए। प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवानी की मौजूदगी में सहकारिता आधारित डेयरी सिस्टम को मजबूत करने पर चर्चा हुई, जिससे पशुपालकों को आय बढ़ाने के नए विकल्प समझाए गए।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने संबोधन में प्रदेश को देश में दुग्ध उत्पादन में अग्रणी बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को “दुग्ध राजधानी” के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही गोशालाओं में प्रत्येक गाय पर 40 रुपये खर्च करने की घोषणा भी की।
पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने बताया कि प्रदेश में दूध संग्रहण 9 लाख लीटर से बढ़कर करीब 12.5 लाख लीटर तक पहुंच चुका है। अब इसे बढ़ाकर 50 लाख लीटर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने ग्वालियर की भूमिका पर जोर देते हुए बताया कि जिले में 68 हजार से अधिक दुग्ध उत्पादक और 4 लाख से ज्यादा पशुधन है।
सम्मेलन में पशुपालन और डेयरी से जुड़े नए प्रयोगों और तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया। मैत्री कार्यकर्ताओं, सफल पशुपालकों और सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। मेला परिसर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी ने पशुपालकों को नई संभावनाओं से परिचित कराया। प्रदेश सरकार वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए ऐसे आयोजनों के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।