बांधवगढ़ में घायल बाघ को मिली नई जिंदगी, इलाज के बाद सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया

Bandhavgarh National Park News: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में घायल 3 वर्षीय बाघ का सफल रेस्क्यू और इलाज किया गया। वन विभाग की टीम ने उपचार के बाद उसे सुरक्षित जंगल में वापस छोड़ दिया।
Bandhavgarh Tiger Rescue
बाघ को छोड़ते हुए कर्मचारी (फोटो सोर्स- नवभारत)
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Bandhavgarh Tiger Rescue : उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण की एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। पनपथा बफर परिक्षेत्र की बिरुहली बीट में घायल मिले करीब तीन वर्षीय नर बाघ को वन विभाग ने समय रहते रेस्क्यू कर सफल इलाज के बाद फिर से सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया।

जानकारी के अनुसार, रविवार को गश्ती दल ने जंगल में एक बाघ के एक पैर में चोट होने की सूचना दी थी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई और क्षेत्र में बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाने लगी। इसके बाद हाथियों और वनकर्मियों की मदद से पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

विशेषज्ञ टीम ने किया रेस्क्यू

सोमवार सुबह वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर की टीम ने बाघ की सफल ट्रैकिंग की। क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय के निर्देशन और उप संचालक के मार्गदर्शन में बाघ को सुरक्षित तरीके से ट्रैंकुलाइज किया गया। इसके बाद मौके पर ही उसका प्राथमिक उपचार किया गया।

स्वास्थ्य जांच और उपचार पूरा

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बाघ का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और आवश्यक ब्लड सैंपल भी लिए गए। डॉक्टरों की टीम ने चोट का इलाज करने के बाद उसकी स्थिति स्थिर बताई। इलाज पूरा होने के बाद बाघ को उसी वन क्षेत्र में सुरक्षित रूप से वापस छोड़ दिया गया।

टीम की लगातार निगरानी जारी

उपचार के बाद भी वन विभाग की टीम बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए है। श्याम और लक्ष्मण नाम के हाथियों के साथ वन अमला क्षेत्र में निगरानी कर रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बाघ पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने प्राकृतिक आवास में सामान्य रूप से रह सके।

वन विभाग की तत्परता की सराहना

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने एक बार फिर साबित किया है कि वन्यजीव संरक्षण और आपातकालीन चिकित्सा के मामलों में उसकी टीम पूरी तरह प्रशिक्षित और तत्पर है। समय रहते की गई कार्रवाई से एक बेशकीमती वन्यजीव की जान बचाई जा सकी।

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