

उज्जैन के रामघाट पर 108 मीटर लंबे कैनवास पर बन रही शिव बारात की विशाल मांडना कलाकृति।
युवा कलाकार सिद्धार्थ भागचंदानी ने 36 घंटे में कलाकृति पूरी करने की चुनौती ली।
दुनिया की सबसे लंबी मांडना कलाकृति बनाने का प्रयास, लिम्का और गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की योजना।
Ujjain Shiv Baraat Painting On 108 Meter Canvas: धर्म और संस्कृति की नगरी उज्जैन में मालवा की पारंपरिक लोककला मांडना को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए अनूठी पहल की जा रही है। शिप्रा नदी के रामघाट पर राणोजी की छत्री के समीप 108 मीटर लंबे और पांच फीट चौड़े कैनवास पर शिव बारात की विशाल कलाकृति बनाई जा रही है। युवा कलाकार सिद्धार्थ भागचंदानी ने इस कलाकृति को 36 घंटे में पूरा करने की चुनौती ली है। शनिवार सुबह करीब 9 बजे शुरू हुए इस आयोजन के जरिए दुनिया की सबसे लंबी मांडना कलाकृति बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों की योजना इस उपलब्धि को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की है।
इस विशाल कैनवास पर भगवान शिव की बारात को मालवा की पारंपरिक मांडना शैली में उकेरा जा रहा है। कलाकार सिद्धार्थ भागचंदानी के अनुसार, कलाकृति की परिकल्पना शिवपुराण और रामचरितमानस के बालकांड से प्रेरित है। इसके जरिए धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और स्थानीय लोककला को एक साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। कलाकृति तैयार करने के लिए पेंट मार्कर और करीब तीन लीटर रंग का इस्तेमाल किया जाएगा। विशाल आकार में शिव बारात को पारंपरिक शैली में प्रदर्शित करना इस आयोजन की खासियत है।
उज्जैन शहर में इस कलात्मक प्रयास को पूरा करने के लिए सिद्धार्थ भागचंदानी ने करीब एक सप्ताह तक शारीरिक तैयारी की है। आयोजन की योजना के अनुसार, उन्हें लगातार 36 घंटे तक बिना सोए मांडना कलाकृति तैयार करनी है। इसके लिए वे लिक्विड डाइट ले रहे हैं। इस चुनौती के माध्यम से वे पारंपरिक कला को बड़े कैनवास पर प्रस्तुत कर नया उदाहरण स्थापित करना चाहते हैं। आयोजन पूरा होने के बाद कलाकृति का उपयोग आर्ट फाउंडेशन के कार्यों में किया जाएगा। हालांकि, विश्व रिकॉर्ड की आधिकारिक मान्यता संबंधित संस्था की जांच और सत्यापन प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
सिद्धार्थ भागचंदानी ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन से बी.डेस. की पढ़ाई की है और यूनाइटेड किंगडम की डंडी यूनिवर्सिटी से डिजाइन में एमएससी की डिग्री हासिल की है। उनका चयन अमेरिका के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के डिजाइन थिंकिंग एंड इनोवेशन प्रोग्राम के लिए भी हुआ है। वे वरिष्ठ नाटक निर्देशक कुमार किशन और नृत्यगुरु डॉ. पल्लवी किशन के पुत्र हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजाइन की पढ़ाई और अनुभव के बाद उनका यह प्रयास मालवा की पारंपरिक लोककला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस आयोजन के दौरान शनिवार और रविवार को रामघाट पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखे गए हैं। इनमें गीत-संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों के साथ सुंदरकांड पाठ, मलखंब प्रदर्शन और युवाओं को जोड़ने के लिए भजन जैमिंग शामिल हैं। आयोजकों के अनुसार, रविवार को राणोजी की छत्री पर विश्व रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया जाएगा। यह आयोजन केवल विशाल कलाकृति तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मालवा की मांडना परंपरा को व्यापक पहचान दिलाने और धार्मिक आस्था के साथ भारतीय लोककला की सुंदरता को देश-दुनिया के सामने लाने का प्रयास भी है।