Ujjain Religious Places Road Widening : उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बीच धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद फिर चर्चा में आ गया है। मंगलवार को जिला प्रशासन और नुमायंदे कमेटी के बीच बैठक हुई। इसमें प्रशासन की ओर से सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले धार्मिक स्थलों की सूची कमेटी को सौंपी गई। इसके बाद शहर काजी खलीकुर्रहमान ने कार्रवाई में सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों के साथ समान व्यवहार की मांग की।
शहर काजी खलीकुर्रहमान ने कहा कि शहर के विकास और सड़क चौड़ीकरण के काम जरूरी हैं, लेकिन धार्मिक स्थलों के मामले में प्रशासन को निष्पक्षता बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई के दौरान सभी धर्मों के स्थलों को एक समान नजर से देखा जाना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने प्रशासन को लेकर कहा, “प्रशासन अपने चश्मे का नंबर बराबर रखे, ताकि किसी को कुछ कहने की जरूरत न पड़े।”
शहर काजी ने कहा कि उज्जैन में कई धार्मिक स्थल लंबे समय से शहर की पहचान और लोगों की आस्था से जुड़े हुए हैं। ऐसे स्थानों को लेकर कोई भी फैसला लेते समय उनकी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने करीब 650 साल पुरानी बताई जा रही शाही मस्जिद का भी जिक्र करते हुए इसे संरक्षित रखने की बात कही।
शाही मस्जिद को लेकर सड़क चौड़ीकरण का विवाद पहले ही हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। 9 सितंबर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मस्जिद के हिस्से को हटाने के नगर निगम के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी थीं। कोर्ट के आदेश में सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 15 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की योजना और क्षेत्र में अन्य धार्मिक संरचनाओं पर हुई कार्रवाई का भी उल्लेख है।
मस्जिद से जुड़े मामले में अदालत जाने वालों को लेकर भी शहर काजी ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ “नादान बच्चे” बिना पूरी तैयारी के कोर्ट चले गए थे और उनका आवेदन भी सही तरीके से तैयार नहीं था। हालांकि, आगे की रणनीति को लेकर उन्होंने कहा कि कमेटी की बैठक और प्रशासन की ओर से रखे गए प्रस्तावों पर चर्चा के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
प्रशासन की ओर से सौंपी गई सूची के बाद अब नुमायंदे कमेटी संबंधित धार्मिक स्थलों और प्रस्तावित कार्रवाई का अध्ययन करेगी। कमेटी के सदस्य आपस में चर्चा करने के बाद प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखेंगे। फिलहाल किसी अंतिम निर्णय की बात सामने नहीं आई है।
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को देखते हुए सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए चौड़ीकरण का काम चल रहा है। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में करीब 80 धार्मिक संरचनाओं से संबंधित कार्रवाई का उल्लेख किया गया है और संबंधित सड़क पर 10 मंदिरों व एक मस्जिद के हिस्से हटाए जाने की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई थी। अब प्रशासन के सामने विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों से जुड़े पक्षों के साथ समन्वय बनाए रखने की चुनौती है।