Highlights :
उज्जैन में अप्रैल 2026 में हुई ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ कॉन्फ्रेंस की वाहन बिलिंग पर सवाल।
वाहन किराए के नाम पर 57 लाख रुपए से ज्यादा भुगतान किए जाने की जानकारी।
दावा: मोपेड के रजिस्ट्रेशन नंबर पर ट्रैवलर का बिल बनाया गया।
ई-रिक्शा के नंबर पर 26 सीटर ट्रैवलर दर्शाने का आरोप।
Mahakal Conference Vehicle Bills Irregularities : उज्जैन में अप्रैल 2026 में आयोजित ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ कॉन्फ्रेंस से जुड़ी वाहन बिलिंग पर गंभीर सवाल उठे हैं। सामने आए बिलों और आरटीओ रिकॉर्ड के मुताबिक कुछ वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर और बिलों में दर्ज वाहन के प्रकार में अंतर बताया गया है।
एक ही दिन में 38 घंटे की ड्यूटी और वाहन के मीटर की रीडिंग में असामान्य बढ़ोतरी भी जांच के दायरे में है। कॉन्फ्रेंस के लिए वाहनों के किराए के नाम पर 57 लाख रुपए से अधिक का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।
वाहन नंबर UP65-ED1523 को बिल में ट्रैवलर बताया गया और उज्जैन में उसकी ड्यूटी बताकर भुगतान किया गया। हालांकि जानकारी के अनुसार आरटीओ रिकॉर्ड में ये नंबर मोपेड का है। दावा है कि संबंधित मोपेड लंबे समय से खराब थी और बनारस की एक वर्कशॉप में खड़ी थी।
वाहन नंबर MP13-ZP4512 से जुड़ा है। बताया गया है कि आरटीओ रिकॉर्ड में ये नंबर ई-रिक्शा ( बैटरी ऑटो ) के नाम पर दर्ज है जबकि बिल में इसे 26 सीटर ट्रैवलर के रूप में दर्शाया गया। रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और बिल में दर्ज वाहन के प्रकार का ये कथित अंतर भुगतान प्रक्रिया की जांच की जरूरत को रेखांकित करता है।
वाहन नंबर MP09-TA8278 के बिलों में भी सवाल उठाने वाली जानकारी सामने आई है। एक ही दिन के लिए अलग-अलग बिलों में 10 घंटे, 13 घंटे और 15 घंटे की ड्यूटी दर्ज होने का दावा है। इनका कुल योग 38 घंटे होता है जबकि एक दिन में 24 घंटे ही होते हैं।
एक ट्रैवलर की ड्यूटी स्लिप में 3 अप्रैल की सुबह मीटर रीडिंग 39,419 किलोमीटर और 4 अप्रैल को 39,616 किलोमीटर दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इसके अगले दिन, 5 अप्रैल की सुबह रीडिंग 62,324 किलोमीटर लिखी गई। इस हिसाब से एक दिन में 22,708 किलोमीटर की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो सामान्य वाहन संचालन के लिहाज से असामान्य है।
उज्जैन शहर में कॉन्फ्रेंस के लिए वाहन किराये के नाम पर 57 लाख रुपए से अधिक के भुगतान की जानकारी के बीच इन कथित विसंगतियों ने खर्च के सत्यापन पर सवाल खड़े किए हैं। अब ये जांच का विषय है कि बिल किस एजेंसी ने प्रस्तुत किए, उनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ और भुगतान से पहले वाहन नंबर, ड्यूटी अवधि तथा मीटर रीडिंग का मिलान किया गया था या नहीं।