खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे महामंडलेश्वर शैलेषानंद गिरी महाराज; बोले- राम की आज्ञा के बिना नहीं हिलेंगे हनुमान

Khade Hanuman Temple Ujjain: उज्जैन के 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर विवाद में पहुंचे महामंडलेश्वर शैलेषानंद गिरी महाराज, प्रतिमा के समक्ष किया हनुमान चालीसा पाठ।
Mahamandaleshwar Shaileshanand Giri Maharaj visits Khade Hanuman Temple
खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे महामंडलेश्वर शैलेषानंद गिरी महाराज(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Shaileshanand Giri Maharaj Statement: उज्जैन के 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रहे विवाद के बीच महामंडलेश्वर स्वामी शैलेषानंद गिरी महाराज मंदिर पहुंचे। उन्होंने हनुमानजी के दर्शन किए और प्रतिमा के सामने बैठकर सभी भक्तों के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर और प्राचीन प्रतिमा को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि वे बाल्यकाल से इस प्रतिमा को देखते आ रहे हैं और इससे जुड़े कई प्रसंगों को करीब से देखा है। उनके मुताबिक, यह स्थान उज्जैन की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रतिमा को हटाने के लिए प्रशासन द्वारा किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए महाराज ने कहा कि कई दिनों तक प्रयास किए जाने के बावजूद प्रतिमा एक इंच भी नहीं हिली। विशाल प्रतिमा को देखकर उन्होंने हनुमान बाहुक की पंक्तियों का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि प्राचीन साधकों और चिंतकों ने हनुमानजी की आज्ञा से इस प्रतिमा को ऐसे स्थान पर स्थापित किया होगा, जिसका धार्मिक महत्व आज भी बना हुआ है।

ट्रैफिक व्यवस्था के लिए विकल्प तलाशने की अपील

मंदिर क्षेत्र में ट्रैफिक और भीड़ की समस्या को लेकर उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन चाहे तो इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था और नए मार्ग विकसित कर सकता है। विकास और यातायात व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इसके लिए शहर के पुराने धार्मिक स्थलों को हटाना उचित नहीं होगा। उज्जैन की पहचान उसके प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ी है, इसलिए विकास योजनाओं में इनके संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

बोले- पुराने धार्मिक स्थलों को हटाने के बजाय संरक्षण जरूरी

उन्होंने कहा कि शहर के बाहर नए मार्ग और विकास की योजनाएं तैयार की जा सकती हैं, जिससे यातायात का दबाव कम किया जा सके। पुराने धार्मिक स्थलों को हटाने के बजाय उनके आसपास बेहतर व्यवस्थाएं विकसित करने की जरूरत है। मध्य प्रदेश सरकार से भी उन्होंने पूरे मामले पर गंभीरता से विचार करने और मंदिर की धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की अपील की।

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“प्रभु श्रीराम की आज्ञा के बिना टस से मस नहीं होंगे हनुमान”

बयान के दौरान उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की आज्ञा के बिना हनुमानजी ने कभी कोई कार्य नहीं किया। ऐसे में यदि प्रतिमा को स्थानांतरित करने की बात है तो पहले धार्मिक भावनाओं और आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को हनुमानजी के सामने नतमस्तक होकर निर्णय लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अहंकार किसी का भी हो, हनुमानजी के आगे नहीं चल सकता।

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