उज्जैन: 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर को शिफ्ट करने में आई परेशानी, प्रशासन तीसरी बार करेगा प्रयास

Ujjain Khade Hanuman Temple Relocation: उज्जैन में विकास और आस्था का अद्भुत संगम, कंठाल से छत्री चौक सड़क चौड़ीकरण के बीच 170 साल पुराने हनुमान मंदिर को स्थानांतरित करने की कवायद तेज।
170 year old Khade Hanuman Temple to be shifted in Ujjain
खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कोशिश जारी (सोर्स- सोशल मीडिया)
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170 Year Old Temple Relocation Ujjain: उज्जैन में विकास कार्य और वर्षों पुरानी आस्था के बीच खड़े हनुमान मंदिर को लेकर स्थिति पेचीदा हो गई है। कंठाल से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण की जद में आए करीब 170 साल पुराने मंदिर को नई जगह स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है। मंदिर के सेवादार महेश पंडित के अनुसार, प्रतिमा को हटाने का आज तीसरा प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में प्रशासन के इंजीनियरों ने इसे सामान्य प्रक्रिया मानते हुए कहा था कि प्रतिमा के नीचे का थोड़ा हिस्सा हटाकर भगवान को उसी स्वरूप में बाहर निकाला जा सकता है। हालांकि, मंदिर की दीवारें हटाने के बाद प्रतिमा को निकालना मुश्किल हो गया।

महेश पंडित के मुताबिक, प्रतिमा को हटाने के लिए प्रशासन लगातार विशेषज्ञों की मदद ले रहा है। शुरुआती योजना के अनुसार काम शुरू किया गया था, लेकिन दीवारें हटने के बाद प्रतिमा की स्थिति ऐसी सामने आई कि उसे सामान्य तरीके से उठाना संभव नहीं रहा। इसके बाद अलग-अलग विशेषज्ञों को बुलाया गया और अब पुरातत्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची है। पुरातत्व विभाग की ओर से प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने के लिए नया सुझाव दिया गया है, जिसे प्रशासन अब आजमाने की तैयारी में है।

बाबा रोज संकेत दे रहे हैं कि यहीं रहना है

मंदिर के सेवादार महेश पंडित ने कहा कि उन्हें लगातार ऐसा महसूस हो रहा है कि बाबा संकेत दे रहे हैं कि उन्हें इसी स्थान पर रहना है। उन्होंने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि इन संकेतों और श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी समझा जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रतिमा को उसके वर्तमान स्वरूप में बिना किसी नुकसान के सुरक्षित तरीके से नई जगह पहुंचाया जाता है तो उन्हें स्थानांतरण पर आपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि उनकी सबसे बड़ी चिंता प्रतिमा को नुकसान पहुंचने की है।

पांच पीढ़ियों से सेवा, टंकी चौक पर विराजेंगे हनुमान

स्थानीय लोगों के अनुसार खड़े हनुमान मंदिर का इतिहास करीब 170 साल पुराना है और पुराने दस्तावेजों में इसका संबंध वर्ष 1857 से बताया जाता है। मंदिर के सेवादार महेश पंडित का परिवार पांच पीढ़ियों से यहां पूजा-अर्चना और सेवा करता आ रहा है। सड़क चौड़ीकरण के विरोध में 30 अगस्त को बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और स्थानीय नागरिकों ने प्रदर्शन किया था। श्रद्धालुओं ने सड़क पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया, जिसके बाद कार्रवाई रोकनी पड़ी थी।

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भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रतिमा को स्तानांतरित करने की तैयारी

अब भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रतिमा को स्थानांतरित करने की तैयारी है। नगर निगम की योजना के अनुसार प्रतिमा को टंकी चौक पर विधि-विधान के साथ पुनर्स्थापित किया जाएगा। श्रद्धालुओं ने नई जगह का नाम हनुमान चौराहा रखने की मांग भी की है। प्रशासन के अनुसार सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले कुल पांच मंदिरों को व्यवस्थित तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा रहा है।

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