महाकाल पार्किंग जमीन विवाद पर चिंतामणि मालवीय का जवाब, कहा- कोई क्रिकेट खेल ले तो वो मैदान उसका नहीं हो जाता
Chintamani Malviya On Land Dispute: विधायक चिंतामणि मालवीय ने महाकाल पार्किंग जमीन विवाद मामले में बयान दिया है। उन्होंने अपने ऊपर लग रहे आरोपों को नकारते हुए इन्हें राजनीति से प्रेरित बताया है।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
चिंतामणि मालवीय, भाजपा विधायक (फोटो सोर्स- नवभारत)
Mahakal Temple Parking Land Dispute: उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के पास पार्किंग में उपयोग हो रही जमीन के सौदे को लेकर चल रहे विवाद पर आलोट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पूरे मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है कि संबंधित जमीन महाकाल मंदिर की है, जबकि वास्तविकता में वह जमीन मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित है।
विधायक मालवीय ने कहा कि जमीन खरीदने की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी तरीके से की गई है। उन्होंने बताया कि किसी भी जमीन को खरीदने से पहले उसकी 50 से 75 साल तक की हिस्ट्री, रिकॉर्ड और सर्चिंग रिपोर्ट की जांच की जाती है। सभी दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही जमीन का सौदा किया गया।
पूरी तरह वैध हैं जमीन के दस्तावेज
उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन जिस श्रेणी में दर्ज होती है, उसी आधार पर उसका टैक्स और शुल्क जमा किया जाता है। यदि जमीन कृषि भूमि है तो कृषि के नियम लागू होते हैं, यदि व्यावसायिक है तो व्यावसायिक नियम लागू होते हैं। उन्होंने दावा किया कि संबंधित जमीन के दस्तावेज पूरी तरह वैध हैं और वर्तमान रिकॉर्ड में जमीन निजी स्वामित्व में दर्ज है।
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पार्किंग होने से जमीन सरकारी नहीं हो जाएगी
पार्किंग और सरकारी जमीन के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक ने कहा कि किसी खाली जगह पर लोग वाहन खड़े करने लगें या क्रिकेट खेलने लगें, इससे जमीन की मालिकाना हक नहीं बदल जाता। उन्होंने कहा अगर कोई जमीन पर क्रिकेट खेल ले तो वह मैदान उसका नहीं हो जाता। उसी तरह किसी जगह पर पार्किंग होने से वह सरकारी जमीन नहीं कहलाने लगती।
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राजनीति चमकाने के लिए बखेड़ा खड़ा किया
चिंतामणि मालवीय ने कहा कि जमीन जिस व्यक्ति या संस्था के नाम दर्ज है, कानूनी रूप से जमीन उसी की मानी जाएगी। यदि सरकार को जमीन की आवश्यकता है तो नियमानुसार उचित मुआवजा देकर अधिग्रहण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अब इस पूरे मामले का फैसला अदालत में होगा। विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ लोग विधायक ने साफ किया कि राजनीति चमकाने के चक्कर में यह सारा बखेड़ा खड़ा किया गया है, जबकि जमीनी हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं है।
