पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (सोर्स - सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: भारतीय राजनीति में जहां पुरुषों का वर्चस्व रहा है, वहीं कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जिन्होंने अपने बलबूते पर मिसाल कायम की है। ऐसी ही एक विलक्षण व्यक्तित्व हैं सुमित्रा महाजन, जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक ‘ताई’ के नाम से जानते हैं। 12 अप्रैल 1943 को महाराष्ट्र के चिपलूण कस्बे में जन्मीं सुमित्रा महाजन का जीवन सिर्फ एक राजनेता का नहीं, बल्कि सेवा, संस्कृति और समर्पण का प्रतीक है। आज ताई का 82वां जन्मदिवस है, उनके इस जन्मदिन पर जानतें है कि किस तरह से एक कथा वाचक से राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया। मीरा कुमार के बाद सुमित्रा महाजन लोकसभा की दूसरी महिला प्रमुख बनीं है।
कोंकणस्थ ब्राह्मण परिवार की एक लड़की कथा वाचिका से लोकसभा तक पहुंची
कोंकणस्थ ब्राह्मण परिवार में जन्मी सुमित्रा महाजन के पिता पुरुषोत्तम नीलकंठ साठे और माता उषा, दोनों ही संस्कृति और शिक्षा के प्रेमी थे। विवाह के बाद सुमित्रा महाजन ने न केवल एमए और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की, बल्कि अपने वक्तृत्व कौशल से भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। एक समय वो भी था जब सुमित्रा महाजन कथा वाचन किया करती थीं, वही अध्यात्मिक साधना आगे चलकर उनके सार्वजनिक जीवन की नींव बनी। इंदौर में विवाह के बाद उनका संपर्क मैना ताई गोखले से हुआ, जो रामकथा में निपुण थीं। मैना ताई के अस्वस्थ होने पर सुमित्रा महाजन ने प्रवचन देना शुरू किया और यहीं से उनका सार्वजनिक जीवन प्रारंभ हुआ। उनके बोलने की शैली और लोगों से जुड़ने की ताकत ने उन्हें इंदौर की जनता के दिलों में जगह दिलाई।
1982 से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
1982 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें इंदौर नगर निगम चुनाव में उतारा, जिसमें वे भारी मतों से जीतीं। 1984 में वह उप-महापौर बनीं और 1985 में विधानसभा चुनाव भी लड़ा, हालांकि पहली बार हार मिली। लेकिन यह हार उन्हें रोक नहीं सकी और वे फिर से प्रवचन की ओर लौटीं और खुद को निखारती रहीं। साल 1989 ने सुमित्रा महाजन के राजनीतिक जीवन में निर्णायक मोड़ लाया। पार्टी ने उन्हें इंदौर लोकसभा सीट से टिकट दिया और उन्होंने देश के तत्कालीन गृह मंत्री प्रकाश चंद्र सेठी को हराकर धमाकेदार एंट्री ली। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
लगातार 8 बार लोकसभा सदस्य रहकर एक बेमिसाल रिकॉर्ड बनाया
सुमित्रा महाजन देश की पहली महिला सांसद हैं जिन्होंने लगातार आठ बार एक ही सीट से जीत दर्ज की। 1991 से लेकर 2014 तक हर चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के दिग्गजों को शिकस्त दी। ये आंकड़े खुद उनकी लोकप्रियता की गवाही देते हैं। लगातार लोकसभा के चुनावों में ताई ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को लाखों वोटों से हराकर जीत दर्ज की है।
लोकसभा की ‘हेड मास्टर’ एक संतुलित नेतृत्व की प्रतीक
सुमित्रा महाजन को 2014 में लोकसभा अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वे मीरा कुमार के बाद दूसरी महिला लोकसभा स्पीकर बनीं। उनके कार्यकाल में सदन की गरिमा बनाए रखना और सभी दलों के बीच संतुलन बनाए रखना उनकी खासियत रही। उनके सहृदय और संतुलित स्वभाव के चलते हर दल में उनके मित्र और प्रशंसक है।
व्यक्तिगत जीवन जहां सेवा और साधना एक साथ लेकर चलीं
सुमित्रा महाजन परिवार के साथ (फोटो सोर्स – सोशल मीडिया)
वकील जयंत महाजन से विवाह के बाद सुमित्रा महाजन इंदौर में बसीं। उनके दो बेटे मिलिंद और मंदार अपने-अपने क्षेत्र में स्थापित हैं। मिलिंद आईटी और व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि मंदार कमर्शियल पायलट हैं।
2019 में राजनीति से विराम, लेकिन प्रेरणा आज भी कायम
2019 में उन्होंने उम्र का हवाला देकर चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया, लेकिन उनका योगदान हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। सार्वजनिक जीवन में एक महिला किस प्रकार ईमानदारी, गरिमा और मेहनत से उच्चतम शिखर तक पहुँच सकती है, सुमित्रा महाजन इसकी जीवंत मिसाल हैं। सुमित्रा महाजन का जीवन केवल राजनीति नहीं, बल्कि सेवा, साधना और समर्पण का अद्वितीय संगम है। ‘ताई’ के रूप में उन्होंने जो पहचान बनाई है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श है। जन्मदिन के इस विशेष अवसर पर हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और उनके योगदान को नमन करते हैं।
जन्मदिन विशेष की अन्य खबरों के लिए इस लिंक पर क्लिक करें