Shivpuri News एक तरफ आतिशबाजी, दूसरी तरफ अंधेरा: सिंधिया के गढ़ में मोबाइल टॉर्च की रोशनी में हुआ अंतिम संस्कार, शर्मनाक सच आया सामने (फोटो- सोशल मीडिया)
MP funeral in mobile torch light: शिवपुरी में रविवार की शाम दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलीं, जिसने विकास के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। एक तरफ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे के स्वागत में शहर दीवाली की तरह जगमगा रहा था, वहीं दूसरी तरफ एक लाचार परिवार को घुप अंधेरे में अपने प्रियजन का अंतिम संस्कार करना पड़ा। यह शर्मनाक वाकया उस शहर का है जिसे सिंधिया का गढ़ कहा जाता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
तारकेश्वरी कॉलोनी के हल्कू राम सोनी के निधन के बाद जब परिजन शव लेकर मुक्तिधाम पहुंचे, तो वहां सब कुछ अंधकारमय था। स्ट्रीट लाइटें बंद थीं और बिजली का कोई नामो-निशान नहीं था। मजबूरन रोते-बिलखते परिवार ने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और टॉर्च की मद्धम रोशनी में अंतिम विदाई की रस्में पूरी कीं। परिजनों ने नगर पालिका और बिजली कंपनी को कई फोन घुमाए, लेकिन जश्न में डूबे प्रशासन ने किसी की सुध नहीं ली और मदद मौके पर नहीं पहुंची।
विडंबना देखिए कि जिस नगर पालिका पर मुक्तिधाम में रोशनी करने की जिम्मेदारी है, उसकी अध्यक्ष गायत्री शर्मा ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महान आर्यमान के स्वागत मंच पर व्यस्त थीं। क्रेन से बड़ी-बड़ी मालाएं पहनाई जा रही थीं और समर्थकों ने उन्हें एक लाख रुपये के सिक्कों से तौला। आतिशबाजी ऐसी थी मानो कोई त्योहार हो। प्रशासन और नेता अपनी नंबर बनाने की होड़ में इतने मशगूल थे कि उन्हें एक आम आदमी की पीड़ा दिखाई नहीं दी। सड़कें तो बैनर-पोस्टरों से पटी थीं, लेकिन श्मशान घाट पर एक बल्ब तक नसीब नहीं हुआ। पूरा प्रशासन आवभगत में लगा रहा और गमजदा परिवार अंधेरे से जूझता रहा।
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इस घटना का वीडियो वायरल होते ही स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना है कि वीआईपी के लिए सब कुछ हाजिर है, लेकिन आम जनता को मरने के बाद भी सम्मान नहीं मिल रहा। मृतक के बेटे शालिग्राम सोनी ने बताया कि उन्होंने बहुत मिन्नतें कीं, पर कोई नहीं आया। अब फजीहत होने के बाद नगर पालिका सीएमओ इशांक धाकड़ ने रटा-रटाया जवाब दिया है कि जानकारी मिली है और जल्द ही लाइट की व्यवस्था सुधारी जाएगी। लेकिन खरी बात तो यही है कि सबको अपनी नेतागिरी चमकानी थी, जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं था।