सीहोर में करोड़ों की नई बिल्डिंग पहली ही बारिश में पानी-पानी; अफसरों ने आंखें मूंदकर लिया हैंडओवर
Sehore Government Building Leakage: सीहोर के सांदीपनि स्कूल की नई बिल्डिंग पहली ही बारिश में हुई जर्जर, छत से टपका पानी, घटिया निर्माण के बाद भी अफसरों ने लिया हैंडओवर, जांच शुरू।
- Reported By: विजेंद्र सिंह राणा | Edited By: सजल रघुवंशी
सीहोर में सरकारी बिल्डिंग का घटिया निर्माण (सोर्स- नवभारत लाइव)
Sehore Government School Building Leak: मध्य प्रदेश सरकार भले ही छात्र-हित और बेहतर शिक्षा के बड़े-बड़े दावे करे लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है ताजा मामला शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मनूबेन सीहोर के नवीन भवन का है, जहां छात्रों के भविष्य और सुरक्षा के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। विद्यालय के लिए लाखों-करोड़ों की लागत से नई चमचमाती बिल्डिंग तैयार तो कर दी गई, लेकिन पहली ही बारिश ने इसके निर्माण कार्य की पोल खोल कर रख दी है।
हैरानी की बात यह है कि अभी मानसून की ठीक से शुरुआत भी नहीं हुई है और पहली ही बारिश में नई नवेली बिल्डिंग की छत से कमरों में पानी टपकने लगा है। आलम यह है कि छत का प्लास्टर झड़ने लगा है दीवारों पर सीलन फैल चुकी है, जिससे न सिर्फ कमरों में बैठना दूभर हो गया है, बल्कि शॉर्ट सर्किट और करंट फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है
घटिया निर्माण के बावजूद शिक्षा विभाग ने लिया हैंडओवर
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़ा होता है। जब बिल्डिंग में साफ तौर पर घटिया निर्माण नजर आ रहा था, तो ऐसी स्थिति में भी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्कूल प्राचार्य ने आनन-फानन में बिल्डिंग का हैंडओवर क्यों ले लिया? कई जगहों पर दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें साफ देखी जा सकती हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर ध्यान देने की बजाय अपनी आंखें मूंद ली हैं
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नई बनी बिल्डिंग में आ रही दरारें
ठेकेदार के लोगों ने झाड़ा पल्ला
जब इस गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार को लेकर निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार के कर्मचारियों और प्रतिनिधियों से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने अपनी गलती मानने या इस पर कोई सफाई देने की बजाय साफ तौर पर पल्ला झाड़ लिया। ठेकेदार पक्ष का यह अड़ियल रवैया साफ दर्शाता है कि उन्हें न तो बच्चों की जान की परवाह है और न ही जिला प्रशासन के किसी डर की क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
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अब सवाल उठता है कि आखिर किसके दबाव या लालच में आकर इस जर्जर हो चुकी नई बिल्डिंग का हैंडओवर लिया गया? क्षेत्र के पालकों और जागरूक नागरिकों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
