

Sehore Government School Scam: मध्य प्रदेश सरकार भले ही सूबे की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन सीहोर से सामने आई तस्वीर इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। सीहोर के शासकीय प्राथमिक शाला नोनीखेड़ी काजी में वर्षों से बच्चे पढ़ाई के लिए स्कूल परिसर नहीं पहुंच रहे हैं।
इसके बावजूद दस्तावेजों में न केवल बच्चों की फर्जी एंट्री दर्ज हो रही है, बल्कि हाजिरी रजिस्टर में उन्हें कभी उपस्थित तो कभी अनुपस्थित दिखाकर कागजी खेल खेला जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिन बच्चों की मौजूदगी सिर्फ कागजों पर है, उनके नाम से नियमित तौर पर मध्यान भोजन (मिड-डे मील) पक रहा है और बजट का पूरा पैसा निकाला जा रहा है।
स्कूल के रखरखाव और अन्य सुविधाओं के नाम पर शासन से आने वाली राशि का भी खुलकर बंदरबांट किया जा रहा है। संस्था की प्रधान अध्यापिका किरण शर्मा जब परिसर में एक भी छात्र मौजूद नहीं है, तो वह किसे पढ़ाती हैं? यह एक बड़ा सवाल है। इन बच्चों के निजी स्कूलों में चले जाने के बावजूद उनका स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) न जारी करना और किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को लिखित शिकायत न भेजना संस्था प्रमुख की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी और विभागीय तंत्र दफ्तरों तक सीमित हैं। जमीनी निरीक्षण के अभाव में शिक्षक सरकार से मुफ्त की तनख्वाह उठा रहे हैं और बच्चे बुनियादी शिक्षा से वंचित हैं। इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी शालू शर्मा ने कहा कि आपके माध्यम से पूरा मामला हमारे संज्ञान में आया है जल्द पूरे मामले की जांच कर कर कार्रवाई करते हैं।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बता दें कि जहां एक तरफ प्रदेश में अच्छी शिक्षा व्यवस्था के बड़े-बड़े दावें हैं, तो वंही दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में इस तरह का फर्जीवाड़ा है। अब देखना यह होगा कि आखिर इस मामले पर जिला प्रशासन और शासन क्या संज्ञान लेता है।