भैरूंदा में रेलवे ट्रैक के बेस के साथ खिलवाड़, मुरुम की जगह भरी जा रही ब्लैक कॉटन साइल; मंडराया हादसे का साया

Sehore Bheurnda Railway Track Construction: भोपाल-इंदौर नई रेल लाइन के निर्माण में भारी लापरवाही, सीहोर के भेरूंदा में ट्रैक के बेस में मुरुम की जगह काली मिट्टी का उपयोग, ग्रामीणों ने की जांच की मांग।
भैरूंदा में रेलवे ट्रैक के बेस के साथ खिलवाड़, मुरुम की जगह भरी जा रही ब्लैक कॉटन साइल; मंडराया हादसे का साया
भोपाल-इंदौर नई रेल लाइन के निर्माण में भारी लापरवाही (सोर्स- नवभारत)
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Bhopal Indore New Railway Line Controversy: भोपाल से इंदौर के बीच बन रही नई रेलवे लाइन के निर्माण कार्य में बरती जा रही कथित लापरवाही को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और चिंता के स्वर उठने लगे हैं। मामला पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल के अंतर्गत आने वाले सीहोर जिले के भेरूंदा क्षेत्र का है। यहां रेलवे ट्रैक के लिए तैयार किए जा रहे बेस (फाउंडेशन) में धड़ल्ले से काली मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है, जो तकनीकी दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील और खतरनाक माना जाता है।

​प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, भेरूंदा क्षेत्र में इन दिनों रेलवे लाइन बिछाने के लिए अर्थवर्क (मिट्टी भराई) का काम तेजी से चल रहा है। लेकिन इस काम में कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर मुरुम या पीली मिट्टी के बजाय भारी मात्रा में काली मिट्टी (ब्लैक कॉटन सॉइल) डाली जा रही है। रेलवे के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में इस तरह की मिट्टी का इस्तेमाल निर्माण की गुणवत्ता पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर रहा है।

​क्यों खतरनाक है काली मिट्टी का उपयोग?

कंप और सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के अनुसार, रेलवे ट्रैक या हाईवे के बेस में काली मिट्टी का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित या बेहद सीमित होना चाहिए। अब इसके पीछे मुख्य कारण हैं:

  • सिकुड़ना और फैलना: काली मिट्टी में पानी सोखने पर अत्यधिक फैलने और सूखने पर गहरी दरारें पड़ने (सिकुड़ने) का गुण होता है।
  • ट्रैक का धंसना: बारिश के दिनों में यह मिट्टी दलदल का रूप ले लेती है, जिससे भारी-भरकम ट्रेनों के गुजरने पर रेलवे ट्रैक के धंसने या असंतुलित होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • हादसे की आशंका: बेस कमजोर होने से पटरियों का एलाइनमेंट बिगड़ सकता है, जो भविष्य में किसी बड़ी रेल दुर्घटना का कारण बन सकता है।

भोपाल रेल मंडल ने साधी चुप्पी

यह पूरा काम भोपाल रेल मंडल के प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों की निगरानी में हो रहा है लेकिन साइट पर चल रही इस मनमानी पर फिलहाल जिम्मेदार अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में ठेकेदार द्वारा पैसों की बचत करने के चक्कर में घटिया सामग्री और काली मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने रखी यह मांग

ग्रामीणों की मांग है कि क्षेत्र के सजग नागरिकों ने मांग की है कि भोपाल मंडल के उच्च अधिकारी तुरंत भेरूंदा पहुंचकर चल रहे काम की तकनीकी जांच कराएं और मानकों के अनुरूप मुरुम का उपयोग सुनिश्चित करें, जिससे भविष्य में होने वाले किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके।

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