सागर: गोद में घायल बेटी, आंखों में इंसाफ की आस...मजदूर पिता कलेक्टर कार्यालय पहुंचा, बोला-बेटी को दिलाएं न्याय

Sagar Collector Office Injured Girl Justice Demand: गोद में घायल मासूम और सिर पर कर्ज का बोझ, मजदूर पिता बेटी के न्याय और इलाज के लिए पहुंचा सागर कलेक्टर दफ्तर। हादसे के बाद इलाज में खर्च हुए 80 हजार।
Father reaches collector office with injured daughter
न्याय के लिए कलेक्टर कार्यालय पहुंचा मजदूर पिता(सोर्स- सोशल मीडिया)
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कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी और गोद में घायल मासूम बेटी, यह तस्वीर सिर्फ एक पिता की मजबूरी नहीं, बल्कि व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े करती है। सागर जिले के बीना से एक मजदूर पिता अपनी 8 साल की घायल बेटी को गोद में लेकर सागर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। उसकी मांग सिर्फ इतनी है कि बेटी को हादसे का न्याय मिले और परिवार को इलाज के बढ़ते बोझ से राहत।

देहरी रोड स्थित शिवधाम कॉलोनी निवासी जितेंद्र प्रजापति मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार में चार बेटियां और एक बेटा है। जितेंद्र के मुताबिक 10 जुलाई को उनकी 8 वर्षीय बेटी वैष्णवी स्कूल से घर लौट रही थी। इसी दौरान देहरी रोड पर मेडिकल के सामने तेज रफ्तार पल्सर बाइक ने बच्ची को टक्कर मार दी।

हादसे के बाद मौके से फरार हुआ बाइक सवार

हादसे के बाद बाइक सवार मौके से फरार हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने घायल वैष्णवी को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज शुरू हुआ। हादसे को एक महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन परिवार की परेशानी कम होने के बजाय लगातार बढ़ती गई। पिता के मुताबिक बेटी के इलाज में अब तक करीब 80 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं। मजदूरी से परिवार चलाने वाले जितेंद्र के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना आसान नहीं था। बेटी के इलाज के लिए उन्हें अपना मकान तक गिरवी रखना पड़ा। अब छह महीने के भीतर रकम नहीं चुका पाए तो परिवार के सिर से छत छिनने का खतरा भी बना हुआ है।

पीड़ित परिवार आरोपी पर कार्रवाई की उम्मीद में काट रहा थाने के चक्कर

जितेंद्र का आरोप है कि हादसे से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज पुलिस को उपलब्ध कराया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक बाइक चालक की पहचान नहीं हो सकी है। आरोपी की पहचान और कार्रवाई की उम्मीद में परिवार कभी पुलिस थाने तो कभी सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहा है। इसी उम्मीद के साथ जितेंद्र अपनी घायल बेटी को गोद में लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। उसका कहना है कि वह मजदूरी करके किसी तरह परिवार का पेट पालता है। बेटी का इलाज कराना उसके लिए आर्थिक रूप से बेहद मुश्किल हो चुका है।

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इस मामले में क्या कार्रवाई करेगा जिला प्रशासन

एक तरफ घायल बच्ची के इलाज की चिंता, दूसरी तरफ घर गिरवी होने का दबाव और तीसरी तरफ हादसे के जिम्मेदार बाइक चालक की तलाश, इन सबके बीच यह पिता अपनी बेटी को गोद में लेकर सिस्टम से इंसाफ की गुहार लगा रहा है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और घायल बच्ची के परिवार को कब तक राहत मिल पाती है।

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