'मंत्री जी गए और सरकारी विभागों के काउंटर खाली', VIP दौरे तक सीमित रह गई गोविंद सिंह राजपूत की जनकल्याण शिविर!

Govind Singh Rajput In Rahatgarh: राहतगढ़ जनकल्याण शिविर में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के जाते ही खाली हुए काउंटर, 22 विभागों के कर्मचारी गायब, शाम 4:25 बजे भटकते रहे दूर-दराज के ग्रामीण।
Rahatgarh Jankalyankari Shivir Sagar Stalls Of Government Department Empty
गोविंद सिंह राजपूत (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Rahatgarh Jankalyankari Shivir Sagar: मध्य प्रदेश के सागर जिले के राहतगढ़ में आयोजित तीन दिवसीय खंड स्तरीय जनकल्याण शिविर में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत शामिल हुए। सुरखी विधानसभा क्षेत्र के जनपद पंचायत परिसर में आयोजित इस शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे।

मंत्री ने सभी विभागीय काउंटरों का निरीक्षण किया, अधिकारियों से योजनाओं और कार्यों की जानकारी ली तथा हितग्राहियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य आम जनता को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना और उनकी समस्याओं का समाधान एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है।

मंत्री ने योजनाओं की जानकारी देकर किया जागरूक

अपने संबोधन में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने सरकार की विभिन्न जनहितकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जनकल्याण शिविरों के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में लोगों की समस्याएं सुनी गईं और कई मामलों का मौके पर ही निराकरण भी किया गया। प्रशासन का दावा है कि शिविर का उद्देश्य आम नागरिकों को त्वरित और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना है।

मंत्री के रवाना होते ही बदल गई शिविर की तस्वीर

हालांकि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद शिविर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए। आरोप है कि मंत्री के काफिले के रवाना होते ही अधिकांश विभागों के कर्मचारी अपने-अपने स्टॉल छोड़कर चले गए। शाम करीब 4:25 बजे कई काउंटर पूरी तरह खाली दिखाई दिए। इस दौरान दूर-दराज से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे लोग अधिकारियों की तलाश करते रहे, लेकिन उन्हें संबंधित विभागों के कर्मचारी नहीं मिले। इससे शिविर में पहुंचे नागरिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

गौरतलब है कि शिविर में 22 सरकारी विभागों के समस्या निवारण काउंटर लगाए गए हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार शिविर के दूसरे दिन तक कुल 928 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 467 आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। लेकिन मंत्री के जाने के बाद कर्मचारियों की अनुपस्थिति ने पूरे आयोजन की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि क्या ऐसे जनकल्याण शिविर केवल वीआईपी दौरों तक सीमित रह जाते हैं। यह घटना प्रशासनिक जवाबदेही और जनसेवा की प्राथमिकताओं को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रही है।