

रीवा के त्योंथर में तहसील कार्यालय के लोकार्पण के दौरान बीजेपी के 2 गुट आमने-सामने
शिलापट्टिका पर नाम और विकास कार्य के श्रेय को लेकर समर्थकों में नारेबाजी
विधायक सिद्धार्थ तिवारी और पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी के बीच जुबानी जंग
लोकार्पण समारोह में बढ़ा तनाव, प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर संभाली स्थिति
Rewa Teonthar BJP Supporters Clash: मध्य प्रदेश के रीवा जिले के त्योंथर में तहसील कार्यालय के लोकार्पण समारोह के दौरान भाजपा की अंदरूनी खींचतान सामने आ गई। कार्यक्रम में भाजपा के पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी और वर्तमान विधायक सिद्धार्थ तिवारी के समर्थक आमने-सामने आ गए। विवाद की वजह शिलापट्टिका और विकास कार्य का श्रेय लेने की सियासत बताई जा रही है।
देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी शुरू हो गई और कार्यक्रम का माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति संभालने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। वहीं, दोनों नेताओं के बयानों के बाद यह विवाद राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
त्योंथर तहसील कार्यालय का लोकार्पण समारोह विकास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था, लेकिन कार्यक्रम के दौरान भाजपा के दो नेताओं के समर्थकों के बीच तनातनी शुरू हो गई। वर्तमान विधायक सिद्धार्थ तिवारी के समर्थक इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार की उपलब्धि बता रहे थे, जबकि पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी के समर्थकों ने भी क्षेत्र में अपने पुराने प्रयासों और भूमिका को लेकर अपनी बात रखी। इसी बीच शिलापट्टिका को लेकर विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों ने नारेबाजी शुरू कर दी।
शिलापट्टिका पर नाम और विकास कार्य का श्रेय लेने को लेकर शुरू हुई खींचतान ने समारोह का माहौल बदल दिया। विवाद बढ़ने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया। घटनाक्रम के दौरान मामला राजधानी भोपाल तक पहुंचने और फोन पर हलचल तेज होने की चर्चा भी सामने आई। हालांकि, इस संबंध में किसी आधिकारिक पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कार्यक्रम में विधायक सिद्धार्थ तिवारी ने तहसील कार्यालय को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार की उपलब्धि बताया। इसके बाद पूर्व विधायक श्यामलाल द्विवेदी ने पलटवार करते हुए क्षेत्र में अपने परिवार की पुरानी राजनीतिक भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने पिछली पीढ़ियों के कार्यकाल को लेकर कथित उत्पीड़न और निर्दोष लोगों को जेल भेजे जाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। इन बयानों के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक तल्खी और चर्चा में आ गई।
त्योंथर में सरकारी कार्यक्रम के दौरान हुआ यह विवाद भाजपा के भीतर श्रेय लेने की राजनीति को उजागर करता है। जिस समारोह में विकास कार्यों की चर्चा होनी थी, वहां शिलापट्टिका और राजनीतिक वर्चस्व का मुद्दा हावी हो गया। फिलहाल, प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति संभलने की जानकारी है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद पर कोई कदम उठाता है या पूर्व और वर्तमान विधायक के समर्थकों के बीच यह खींचतान आगे भी जारी रहती है।