MP Anganwadi co-location: एक परिसर में लगेंगे आंगवाड़ी और स्कूल ,छोटे बच्चों की झिझक को खत्म करने का प्रयास
Mission Saksham Anganwadi: आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों का को-लोकेट किया जा रहा है। इस व्यावहारिक रणनीति का उद्देश्य बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और देखभाल की एक ऐसी मजबूत नींव रखना
- Written By: सुधीर दंडोतिया
आंगवाड़ी , सोर्स: सोशल मीडिया
Anganwadi And Primary Schools Bhopal: छोटे बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत अक्सर एक अनजान जगह से होती है, जहां उनको नया माहौल मिलता है। इस माहौल के डर और झिझक को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी और प्राथमिक विद्यालय को अब एक ही परिसर में लाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और ‘मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0’ के विज़न को धरातल पर उतारने के लिए केन्द्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। अब आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों का को-लोकेट किया जा रहा है। इस व्यावहारिक रणनीति का उद्देश्य बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और देखभाल की एक ऐसी मजबूत नींव रखना है, जो उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सके।
क्या बदलेगा इस व्यवस्था से ?
यह को-लोकेशन मॉडल मुख्य रूप से उन आंगनवाड़ी केंद्रों पर लागू किया जा रहा है जो प्राथमिक विद्यालयों के समीप स्थित हैं और जहाँ बच्चों के लिए सुरक्षित पहुँच उपलब्ध है। भौगोलिक कारणों से जिन क्षेत्रों में भौतिक रूप से को- लोकेशन संभव नहीं है, वहाँ समीपस्थ प्राथमिक विद्यालयों के साथ आंगनवाड़ी केंद्रों की डिजिटल मैपिंग की जा रही है जिससे दोनों संस्थानों के बीच समन्वय और संसाधनों का साझा उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
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कक्षाओं में होने वाले ड्रॉप आउट की दर में कमी लाने की कोशिश
इस एकीकृत मॉडल से बच्चों का आंगनवाड़ी केन्द्रों से पहली कक्षा में स्थानांतरण बेहद सुचारू और सहज हो जाएगा। विद्यालय परिसर से पहले से परिचित होने के कारण बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे शुरुआती कक्षाओं में होने वाले ड्रॉप आउट की दर में भारी कमी आएगी। इस नई व्यवस्था से आंगनवाड़ी के बच्चों को स्कूलों की आधुनिक अधोसंरचना, खेल के मैदानों और उन्नत शैक्षणिक संसाधनों तक समान पहुँच मिलेगी। आंगनवाड़ी एवं विद्यालीन समन्वय से बच्चों के डेटा का मिलान आसान होगा, जिससे सेवाओं के दोहराव से बचा जा सकेगा और प्रत्येक बच्चे तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुँचना सुनिश्चित हो।
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‘विद्यारंभ’- म.प्र. ने रचा इतिहास
आंगनवाड़ी और प्राथमिक स्कूलों के इस को-लोकेशन मॉडल को प्रभावी बनाने में ‘विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम’ एक ऐतिहासिक कड़ी साबित हो रहा है, जो बच्चों की औपचारिक शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत को रेखांकित करता है। राष्ट्रीय चिंतन शिविर के निर्णयों के अनुरूप बाल चौपाल अर्ली चाइल्ड हूड केयर एंड एजुकेशन -डे) के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के 94 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में एक साथ “विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण समारोह” संपन्न हुआ। पूरे प्रदेश में एक साथ इस गरिमामयी अभियान को सफलतापूर्वक संचालित करने वाला मध्यप्रदेश देश का प्रथम राज्य बना है। इस महाअभियान में 5 से 6 वर्ष की आयु वर्ग के 9.28 लाख से अधिक बच्चों को उनके जीवन की पहली औपचारिक शिक्षा यात्रा के लिए प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
