राहुल गांधी कैसे उतारेंगे ‘गुल्लक’ का कर्ज, मरते-मरते बाप ने की है कांग्रेस से अपील..!
भारत जोड़ो यात्रा के दौरान गुल्लक भेंट करने वाले परिवार की मदद करने के लिए अब राहुल गांधी कुछ करते हैं या मनोज परमार की आत्महत्या के पहले की गयी अपील को खारिज करके परिवार को भूलने की कोशिश करते हैं। अब सबकी नजर उन पर है।
- Written By: विजय कुमार तिवारी
पत्नी के साथ मनोज परमार व राहुल गांधी गुल्लक के साथ (डिजाइन फोटो)
भोपाल : मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक व्यापारी मनोज परमार और उनकी पत्नी नेहा परमार के द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले को लेकर एक ओर जहां राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गयी है तो वहीं दूसरी ओर सबकी नजर राहुल गांधी की ओर है। हर कोई जानना चाहता है कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान गुल्लक भेंट करने वाले परिवार की मदद करने के लिए क्या मदद करने वाले हैं। मनोज परमार ने आत्महत्या करने के पहले राहुल गांधी से निवेदन करते हुए कह गया है कि मेरे मरने के बाद इन बच्चों की ज़िम्मेदारी आपकी और कांग्रेस पार्टी की है।
आपको बता दें कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान गुल्लक भेंट करने वाले व्यापारी मनोज परमार और उसकी पत्नी नेहा परमार ने शुक्रवार (13 दिसंबर) को पर आत्महत्या कर ली है। कहा जा रहा है कि दंपति के पास से मिले एक नोट के बाद इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी और एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है। इसके घर पर पांच दिसंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापा मारा था। आरोपों में कहा जा रहा है कि छापेमारी से पीड़ित होकर मनोज परमार ने यह कदम उठाया है। मामले में कांग्रेस का कहना है कि ईडी का छापा डालकर परिवार पर दबाव डाला है, जिससे वह मरने को मजबूर हो गया। वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही है।
पिछले साल ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान पहली बार मनोज परमार और उनका परिवार सुर्खियों में उस समय आया था जब उनके बच्चों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान उन्हें एक गुल्लक भेंट करके मुलाकात की थी। राहुल गांधी से मिलने के बाद इन बच्चों की मुलाक़ात कांग्रेस के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी हुई थी।
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पत्नी के साथ मनोज परमार
कहा जा रहा है कि आत्महत्या के पहले मनोज ने एक पत्र लिखा था। इस पत्र में मनोज परमार ने आरोप लगाया है कि ईडी के अधिकारी उनपर बीजेपी में शामिल होने के लिए दबाव बनाने की बात कही है। हालांकि इस मामले में सीहोर पुलिस अधीक्षक दीपक शुक्ला ने कहा कि पुलिस टीम को आत्महत्या की सूचना मिली थी जिसके बाद टीम मौके पर पहुंची. पुलिस ने मृतक के घर से संबंधित चीज़ें ज़ब्त की हैं, इनमें कुछ दस्तावेज़ भी हैं। मामले में जांच जारी है। जो भी साक्ष्य और तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई की जाएगी।
ऐसा है परिवार
मनोज और नेहा परमार के तीन बच्चे थे, जिनमें एक बेटी और दो बेटे शामिल हैं। मनोज परमार की 17 साल की बड़ी जिया परमार ने कहा कि उनके पिता पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा था, जिसकी वजह से उनके माता-पिता यह कदम को उठाने पर मजबूर हो गए। घटना से पहले वाली रात को उनकी माता-पिता से बात हुई थी, लेकिन वो परेशान नहीं लग रहे थे। आख़िरी बार हमारी बात गुरुवार की रात को हुई थीय़ सब कुछ सामान्य था, हमने साथ में मिलकर खाना खाया था, हंसी मज़ाक किया। तब तक पापा डिप्रेशन में नहीं लग रहे थे। हमें कोई अंदेशा नहीं था कि आखिरी बार पापा- मम्मी को हंसते हुए देख रहे हैं।
बेटी जिया परमार का दावा
जिया परमार का कहना है कि शायद पिताजी हम लोगों को परेशान होने से बचाने के लिए अपनी समस्याएं नहीं बताते थे। पिता जी ईडी की जांच और अधिकारियों से परेशान थे। वो बहुत परेशान हो गए थे।
बड़े भाई राजेश परमार बोले
मनोज के बारे में उनके बड़े भाई राजेश परमार ने बताया कि साल 2016 में उनके भाई पर प्रदेश की आर्थिक अपराध शाखा में धोखाधड़ी और फ्रॉड का केस दर्ज हुआ था। साल 2016 के उसी मामले पर पहले आर्थिक अपराध शाखा, फिर सीबीआई और अब प्रवर्तन निदेशालय द्वारा केस दर्ज किया गया था। भाई एक ही मामले पर बार बार अलग अलग एजेंसियों द्वारा परेशान किए जाने को लेकर तंग चल रहा था। इसके बाद दिसंबर को जब ईडी के अधिकारियों ने छापा मारा था उस दिन भी मनोज को बहुत परेशान किया गया था। शायद इसी सब से परेशान होकर दोनों ने ऐसा कदम उठा लिया होगा।
पुलिस ने माना-मिले हैं दस्तावेज
मामले की जांच में शामिल पुलिस अफसरों ने भी माना है कि मनोज परमार और नेहा परमार की आत्महत्या के बाद उनके घर से कुछ दस्तावेज़ भी ज़ब्त किए हैं। इसमें कुछ जांच एजेंसियों के अधिकारियों और अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए हैं। लेकिन इसे अभी सुसाइड नोट नहीं कहा जा सकता है। इसकी जांच की जा रही है। लेटर में किसी का हस्ताक्षर नहीं है इसलिए इसकी सत्यता की जांच की जा रही है।
ये है राहुल गांधी से अपील
यह भी दावा किया जा रहा है कि मनोज परमार ने इस लेटर में लिखा है कि कांग्रेस से जुड़ने के कारण हमें ईडी परेशान कर रही है जिसके कारण आज मुझे आत्महत्या करनी पड़ रही है। इसीलिए इसमें आगे राहुल गांधी से निवेदन करते हुए कहा गया है कि कि मेरे मरने के बाद इन बच्चों की ज़िम्मेदारी आपकी और कांग्रेस पार्टी की होगी। बच्चों को अकेला मत छोड़ना।
