मुरैना: जर्जर हुआ स्कूल भवन, मवेशियों के टिनशेड में पढ़ने को मजबूर 35 बच्चे, 542 स्कूलों को मरम्मत का इंतजार

Morena School News: मुरैना के पहाड़गढ़ के चांचुल गांव में 22 साल पुराना स्कूल भवन जर्जर होने से 35 बच्चे टिनशेड और पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। जिले के 542 स्कूल भवनों को मरम्मत का इंतजार है।
Children Studying Under a Tree and in a Tin Shed
टिनशेड के नीचे पढ़ते स्कूली बच्चेफोटो सोर्स- नवभारत
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दतिया में नरोत्तम मिश्रा का शक्ति प्रदर्शन, 5 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने किया जोरदार स्वागतMorena School Building : सरकारी स्कूल भवनों की गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर मुरैना जिले के पहाड़गढ़ ब्लॉक के चांचुल गांव से सामने आई है। यहां करीब 22 साल पहले बना प्राथमिक स्कूल भवन अब इतना जर्जर हो चुका है कि उसमें बच्चों को बैठाना जोखिम भरा हो गया है। दीवारों में जगह-जगह दरारें हैं, छत का प्लास्टर उखड़ चुका है और लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं। हादसे की आशंका को देखते हुए शिक्षक और बच्चों ने भवन में कक्षाएं लगाना बंद कर दिया है।

चांचुल गांव का प्राथमिक स्कूल भवन वर्ष 2003-04 में बनाया गया था। सवा दो दशक बीतते ही इसकी हालत इतनी खराब हो गई कि अब यह बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं बचा है। स्कूल की दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि छत का प्लास्टर लगातार टूटकर गिर रहा है। कई जगह लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं, जिससे छत का ढांचा बेहद खतरनाक नजर आता है। शिक्षकों के मुताबिक, कक्षाओं के दौरान बच्चों के आसपास छत का हिस्सा गिरने की घटनाएं भी हो चुकी हैं।

बारिश में और बिगड़ जाती है स्थिति

बारिश के दौरान जर्जर स्कूल भवन की परेशानी और बढ़ जाती है। बारिश होने के बाद छत से पानी टपकता रहता है और कई बार तीन-तीन दिन तक पानी रिसता रहता है। ऐसे हालात में बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल भवन में कक्षाएं लगाना बंद कर दिया गया। भवन के बाहर एक नोटिस भी लगाया गया है, जिसमें जर्जर स्थिति के कारण स्कूल का संचालन दूसरी जगह किए जाने की जानकारी दी गई है।

मवेशियों के टिनशेड में लग रही कक्षाएं

फिलहाल चांचुल प्राथमिक स्कूल में 35 बच्चे और दो शिक्षक हैं। स्कूल भवन से करीब एक किलोमीटर दूर एक ग्रामीण के टिनशेड में बच्चों की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। खास बात यह है कि इसी टिनशेड में पहले मवेशियों को बांधा जाता था। जगह कम होने के कारण कई बच्चों को पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। यानी जिन बच्चों को सुरक्षित और बेहतर स्कूल भवन मिलना चाहिए, उनकी पढ़ाई फिलहाल टिनशेड और खुले आसमान के नीचे हो रही है।

अतिरिक्त कक्ष बनाने का दिया गया भरोसा

शिक्षकों के मुताबिक, स्कूल भवन की खराब स्थिति को लेकर जिला पंचायत सीईओ को जानकारी दी गई थी और समस्या के समाधान की मांग की गई थी। उन्हें बताया गया है कि बारिश का दौर खत्म होने के बाद अतिरिक्त कक्ष बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, जब तक नया इंतजाम नहीं होता, तब तक बच्चों को टिनशेड और पेड़ के नीचे ही पढ़ना पड़ रहा है। इससे पढ़ाई के साथ-साथ मौसम की मार से बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

जिले में 542 स्कूल भवनों को मरम्मत का इंतजार

चांचुल का मामला मुरैना जिले में अकेला नहीं है। जिले में 1776 प्राथमिक और 560 मिडिल स्कूल हैं। इनमें 542 स्कूल भवन ऐसे हैं, जिन्हें मरम्मत की जरूरत है। जिला शिक्षा केंद्र ने इन भवनों के मेंटेनेंस के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है, लेकिन अभी तक केवल 52 स्कूल भवनों को मरम्मत के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिली है। ऐसे में 490 जर्जर स्कूल भवन अभी भी मरम्मत की स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं।

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103 भवन ढहाए गए, 37 के निर्माण की प्रक्रिया अटकी

जिले में जर्जर घोषित किए जाने के बाद 103 स्कूल भवनों को ढहाया भी जा चुका है। इनमें से 70 भवनों के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अब तक 33 भवनों के निर्माण को प्रशासकीय अनुमति मिली है, जबकि 37 भवनों का मामला अभी प्रक्रिया में है। डीपीसी हरिश तिवारी के अनुसार, एक साल पहले 450 और बाद में 92 स्कूल भवनों के मेंटेनेंस के प्रस्ताव भेजे गए थे। हालांकि, चांचुल के जर्जर स्कूल भवन का मेंटेनेंस प्रस्ताव ब्लॉक स्तर से जिला शिक्षा केंद्र को नहीं मिला है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब तक नया भवन या मरम्मत नहीं होती, तब तक 35 बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा।

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