

Question Raised On Morena Policing: मुरैना जिले के रामपुरकला थाने से पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि गुंडा सूची में दर्ज एक बदमाश ने थाना परिसर में ही पंचायत लगा ली। मामला डेढ़ साल से विवादित ट्रैक्टर-ट्रॉली लौटाने का था। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई करने की बजाय समझौते की कोशिश करती रही।
जानकारी के मुताबिक, रामपुरकला थाना क्षेत्र के जारौली निवासी राघवेंद्र उर्फ बड़े कुशवाह, जिसका नाम थाना की गुंडा सूची में 17वें नंबर पर दर्ज है, पर अपने परिचित सोनू की ट्रैक्टर-ट्रॉली डेढ़ साल पहले लेकर हड़पने का आरोप है। पीड़ित का कहना है कि ट्रॉली वापस मांगने पर आरोपी ने अपने भाइयों के साथ मिलकर उसके घर पहुंचकर मारपीट की।
आरोप यह भी है कि इस दौरान उसकी गर्भवती पत्नी के पेट में लात मारी गई, जिससे समय से पहले प्रसव हो गया पीड़ित के अनुसार, स्थानीय थाने में पहले उसकी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गई। बाद में पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद एफआईआर तो दर्ज हुई लेकिन ट्रॉली आज तक वापस नहीं मिली। मंगलवार को एसपी के निर्देश पर पीड़ित रामपुरकला थाने पहुंचा, जहां थाना प्रभारी ने आरोपी राघवेंद्र उर्फ बड़े कुशवाह और गांव के लोगों को भी बुला लिया।
आरोप है कि इसके बाद थाना परिसर में ही पंचायत शुरू हो गई और कसम खिलाकर विवाद सुलझाने का प्रयास किया गया। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि हाल ही में पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा ने सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि थानों में अपराधी और दलाल नजर नहीं आने चाहिए। इसके बावजूद गुंडा सूची में शामिल आरोपी का थाना परिसर में बैठकर पंचायत करना चर्चा का विषय बना हुआ है।
थाना प्रभारी रामपुरकला रामकुमार वर्मा ने बताया कि एसपी साहब ने जनसुनवाई से सोनू को हमारे पास भेजा था। हमने दोनों पक्षों और गांव के पंचों को बैठाकर बातचीत कराई। बड़े उर्फ राघवेंद्र कुशवाह से ट्रॉली लाने के लिए कहा गया है। वह ट्रॉली लेकर आएगा तो तुरंत दिलवा दी जाएगी।
अब सवाल यह है कि जब किसी आरोपी का नाम पहले से गुंडा सूची में दर्ज हो, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई प्राथमिकता होनी चाहिए या फिर थाना परिसर में पंचायत? फिलहाल यह मामला पुलिस व्यवस्था और कानून के पालन को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।
https://youtu.be/9PW-pbGgOzA?si=IzPRUDW0YNQz0G-f