मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई, 100 दिन रहा सक्रिय, 7 अक्टूबर को पूर्वी हिस्से में बारिश का अनुमान

MP Weather News : मध्य प्रदेश में इस बार मानसून 100 दिन सक्रिय रहा। सीजन में 908.4 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य से 4% कम है। 7 अक्टूबर को पूर्वी हिस्से के 12 जिलों में बारिश की संभावना है।
Madhya Pradesh monsoon farewell
मध्य प्रदेश से विदा हुआ मानसूनफोटो सोर्स- AI
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MP Monsoon Update : मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक विदाई हो गई है। इस बार मानसून 24 जून को प्रदेश में दाखिल हुआ था और 3 अक्टूबर को इसकी विदाई हुई। यानी करीब 100 दिन तक मानसून सक्रिय रहा। हालांकि, मानसून की विदाई के बाद भी अक्टूबर में रिमझिम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, 7 अक्टूबर को प्रदेश के पूर्वी हिस्से में गरज-चमक और आंधी के साथ बारिश हो सकती है।

मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के साथ मौसम अब नए चरण में प्रवेश कर गया है। अक्टूबर में दिन के समय गर्मी का असर बढ़ेगा, जबकि रात में ठंड महसूस होने लगेगी। ज्यादातर शहरों में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री से नीचे रहने की संभावना है। अगस्त और सितंबर जैसी तेज बारिश अब नहीं होगी, लेकिन कुछ इलाकों में रिमझिम बारिश का दौर जारी रह सकता है।

1 जून से 30 सितंबर तक मानसूनी सीजन

मध्य प्रदेश में मानसून ने 24 जून को प्रवेश किया था और महज 9 दिन में पूरे प्रदेश में फैल गया था। इसके बाद जून में 6 दिन, जुलाई में 31 दिन, अगस्त में 31 दिन, सितंबर में 30 दिन और अक्टूबर में 2 दिन मानसून सक्रिय रहा। हालांकि, मौसम विज्ञान के लिहाज से दक्षिण-पश्चिम मानसून का आधिकारिक सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इसी अवधि में होने वाली बारिश को मानसूनी बारिश कहा जाता है।

प्रदेश में 95.9% बारिश दर्ज

दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच की तुलना में करीब 1.5 इंच कम है। इस तरह प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से 4 प्रतिशत कम रही। हालांकि, पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम पानी गिरा।

पूर्वी हिस्से में इन संभागों में ज्यादा बारिश

प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 4 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज हुई। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश हुई। वहीं पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।

25 जिलों में बारिश का कोटा फुल

प्रदेश के 25 जिलों में मानसून के दौरान बारिश का कोटा पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं। वहीं बाकी 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

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7 अक्टूबर से फिर बदल सकता है मौसम

अगले कुछ दिनों तक मध्य प्रदेश का मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है। 4, 5 और 6 अक्टूबर को प्रदेश में कहीं भी बारिश की संभावना नहीं है। इन दिनों धूप खिलने से दिन के तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद 7 अक्टूबर को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर में हल्की बारिश हो सकती है। इन इलाकों में गरज-चमक और आंधी के साथ बारिश होने का अनुमान है। 8 और 9 अक्टूबर को भी प्रदेश में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना बनी हुई है।

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