

Morena Waterlogging Problem: मुरैना में मंगलवार को महज एक घंटे की तेज बारिश ने नगर निगम की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। शहर की मुख्य सड़कें, बाजार और कई रिहायशी इलाके घुटनों तक पानी में डूब गए। जलभराव के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया, जबकि कई स्थानों पर वाहन पानी में फंसने से यातायात भी प्रभावित रहा।
तेज बारिश के बाद जीवाजीगंज, लोहिया बाजार, गणेशपुरा और न्यू हाउसिंग बोर्ड सहित शहर के कई प्रमुख इलाकों में सड़कें तालाब जैसी नजर आईं। घुटनों तक भरे पानी के बीच लोगों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई दोपहिया और चारपहिया वाहन पानी में बंद हो गए, जिससे लोगों को काफी परेशानी हुई।
बारिश के बाद हालात का जायजा लेने महापौर शारदा राजेंद्र सोलंकी जलभराव वाले क्षेत्रों में पहुंचीं। उन्होंने सड़क पर खड़े होकर नगर निगम आयुक्त सत्येंद्र सिंह धाकरे से नालियों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। महापौर ने अधिकारियों को तत्काल जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने और प्रभावित क्षेत्रों से पानी निकालने के निर्देश दिए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बारिश से पहले नालों और नालियों की समुचित सफाई नहीं कराई गई। इसी कारण केवल एक घंटे की बारिश में शहर जलमग्न हो गया। लोगों का आरोप है कि हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। बारिश का असर बाजारों में कारोबार पर भी पड़ा। कई दुकानों के सामने पानी भर गया, जबकि कॉलोनियों में घरों के बाहर जलभराव होने से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
नगर निगम आयुक्त सत्येंद्र धाकरे ने कहा कि शहर के नालों की सफाई पहले ही कराई जा चुकी थी और यह काम लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि जहां जलभराव हुआ था, वहां से आधे घंटे के भीतर पानी निकल गया। सुबह छह बजे से निगम की टीमें मैदान में थीं और जरूरत के अनुसार निकासी का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शहर का भू-स्तर समतल होने के कारण पानी धीरे-धीरे निकलता है।
मुरैना में हर मानसून के दौरान जलभराव की तस्वीरें सामने आती हैं और हर बार व्यवस्थाओं में सुधार के दावे किए जाते हैं। इस बार भी सिर्फ एक घंटे की बारिश ने नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन केवल आश्वासन देता है या जलभराव की स्थायी समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम भी उठाता है।