Mandla News: नर्मदा स्वच्छता जांच के दौरान विवाद, कर्मचारी ने लगाया प्रियंक कानूनगो पर प्रताड़ना का आरोप

Alligation On Priyank Kanoongo: मंडला में नर्मदा स्वच्छता निरीक्षण के दौरान नगरपालिका कर्मचारी ने मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो पर दबाव बनाकर पानी पिलाने और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया।
Priyank Kanoongo Narmada Water Controversy Mandla
प्रियंक कानूनगो और पीड़ित कर्मचारी (फोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन)
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Mandla Narmada Water Controversy: मंडला में नर्मदा नदी की स्वच्छता को लेकर किए गए निरीक्षण के दौरान उपजा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। मामला केवल नदी में कथित प्रदूषण की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक नगरपालिका कर्मचारी के साथ कथित दुर्व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों के कारण मानवाधिकार और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, नर्मदा नदी में मिल रहे कथित प्रदूषित जल की जांच के लिए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो मंडला पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान नर्मदा तट के पास जमा पानी को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। नगरपालिका परिषद के कर्मचारी पुष्पेंद्र पांडे का आरोप है कि उन्हें मौके पर बुलाकर उक्त पानी पीने के लिए दबाव बनाया गया।

पानी पीने के लिए किया मजबूर

कर्मचारी का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों को समझाने का प्रयास किया कि यह किसी नाले का गंदा पानी नहीं, बल्कि पुलिस लाइन की पानी की टंकी का ओवरफ्लो है। इसके बावजूद उनकी बात नहीं मानी गई और कथित रूप से उन्हें पानी पीकर दिखाने के लिए मजबूर किया गया।

सार्वजनिक रूप से अपमानित किया

पुष्पेंद्र पांडे का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया, जिससे वे मानसिक तनाव में आ गए। उनका कहना है कि घटना के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें मंडला जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष अशोक मर्सकोले ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी के साथ प्रताड़ना हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने नर्मदा नदी में मिलने वाले गंदे नालों को स्थायी रूप से बंद करने की मांग भी उठाई।

खड़े हो रहे कई सवाल

घटना के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या किसी जांच या निरीक्षण के दौरान किसी कर्मचारी की गरिमा और सम्मान से समझौता किया जा सकता है। मानव अधिकारों की रक्षा के लिए जिम्मेदार संस्था के प्रतिनिधि पर ही ऐसे आरोप लगना कई सवाल खड़े कर रहा है।

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