बाढ़ से निपटने का ‘मास्टर प्लान’ तैयार! 34 गांवों पर प्रशासन की पैनी नजर; शिक्षकों को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी
Khargone News: आगामी मानसून और संभावित बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने नर्मदा किनारे के 34 गांवों के लिए अलर्ट जारी किया है। 1 जून से कंट्रोल रूम शुरू होगा, शिक्षकों को आपदा टीम का प्रभारी बनाया गया है।
- Written By: सजल रघुवंशी
आगामी मानसून और बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट (प्रतीकात्मक इमेज, सोर्स- सोशल मीडिया)
Flood Disaster Management Plan 2026: आगामी मानसून और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन सतर्क हो गया है। शुक्रवार को एसडीएम कार्यालय में आयोजित खंड स्तरीय बैठक में बाढ़ आपदा प्रबंधन को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई।
एसडीएम सत्येंद्र बैरवा की अध्यक्षता में हुई बैठक में नदी और तालाब किनारे बसे संवेदनशील गांवों के लिए स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन टीम गठित करने के निर्देश दिए गए।
34 गांव चार नदियों से प्रभावित श्रेणी में
बैठक में जानकारी दी गई कि तहसील क्षेत्र के 34 गांव नर्मदा नदी, वेदा नदी, कुंदा नदी और बोराड नदी से प्रभावित श्रेणी में शामिल हैं। इनमें निचले क्षेत्रों और तालाबों के आसपास बसे गांवों को अधिक संवेदनशील माना गया है। प्रशासन ने जनपद पंचायत और नगर परिषद को नदी-नालों के आसपास लगातार निगरानी बनाए रखने और लोगों को समय-समय पर सतर्क करने के निर्देश दिए हैं।
सम्बंधित ख़बरें
भोजशाला विवाद: मुस्लिम पक्ष से पहले हिंदू पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, दाखिल की ‘कैविएट’ याचिका
Dhar Bhojshala Verdict: CM मोहन यादव ने किया हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत; बताया सांस्कृतिक न्याय का क्षण
MP में जल क्रांति! गंगा दशहरे पर पूरे प्रदेश में होगा सामूहिक श्रमदान; CM मोहन यादव ने उज्जैन से फूंका बिगुल
Dhar Bhojshala: कौन थे कमाल मौला, जिनके नाम पर धार का भोजशाला बन गया दरगाह? जानिए इस विवाद का पूरा सच
स्थानीय शिक्षक होंगे टीम प्रभारी
बाढ़ प्रभावित गांवों में स्थानीय शिक्षकों को टीम प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। उनके साथ पटवारी, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और चौकीदार को भी टीम में शामिल किया गया है। प्रशासन के मुताबिक, आपदा की स्थिति बनने पर यही टीम तुरंत राहत और बचाव कार्यों की कमान संभालेगी।
1 जून से 15 सितंबर तक की जाएगी खास व्यवस्था
एसडीएम कार्यालय स्थित बाढ़ नियंत्रण कक्ष में 1 जून से 15 सितंबर तक 24 घंटे इमरजेंसी व्यवस्था संचालित की जाएगी। इसके लिए खंड स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। साथ ही गोताखोरों, नाविकों, ट्रैक्टर मालिकों और अन्य जरूरी वाहनों की सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग को संवेदनशील सड़कों, पुलों और पुल-पुलियों पर चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जरूरत पड़ने पर यातायात रोकने के लिए बैरिकेड्स, फ्लेक्स और संकेतक बोर्ड भी लगाए जाएंगे।
2023 की बाढ़ ने मचाई थी भयंकर तबाही
प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2023 में आई बाढ़ से कुल 1244 लोग प्रभावित हुए थे। उस दौरान 11 राहत शिविर स्थापित किए गए थे, जहां करीब 1916 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ठहराया गया। राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं, अस्थायी शौचालय और प्रकाश व्यवस्था जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई थीं।
यह भी पढ़ें: भोजशाला विवाद: मुस्लिम पक्ष से पहले हिंदू पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, दाखिल की ‘कैविएट’ याचिका
रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ के कारण दो लोगों की मौत हुई थी और 27 मकानों को नुकसान पहुंचा था। वहीं फसल क्षति समेत कुल नुकसान का अनुमान 363.82 लाख रुपये लगाया गया था। प्रभावित परिवारों को शासन के निर्धारित प्रावधानों के तहत आर्थिक सहायता भी दी गई थी।
