

Khandwa NSUI Congress Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को मध्य प्रदेश के खंडवा में कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया।
एसएन कॉलेज के सामने आयोजित विरोध प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल भी खड़े किए गए।
मंगलवार को खंडवा के एसएन कॉलेज के सामने कांग्रेस पार्टी और एनएसयूआई के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। इस दौरान केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि छात्रों की मांगों को दबाने के बजाय सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए।
प्रदर्शन को जिला कांग्रेस अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. मुनीश मिश्रा और महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष रचना तिवारी ने संबोधित किया। नेताओं ने कहा कि छात्रों को अपनी समस्याएं और मांगें लोकतांत्रिक तरीके से रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार छात्रों की आवाज सुनने के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाती है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की मांगों की लगातार अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस पार्टी और एनएसयूआई ने एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही है। वहीं प्रदर्शन में शामिल छात्रा पूजा शर्मा ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि देश के वास्तविक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज को धार्मिक विवादों से आगे बढ़कर शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य जैसे अहम विषयों पर गंभीर चर्चा करनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि छात्रों के हितों की अनदेखी के खिलाफ उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
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