

Congress Protests at PM Residence: राजधानी दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने आज प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकालते हुए जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और पीएम अवासा के बाहर धरने पर बैठ गए। इस प्रदर्शन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, पवन खेड़ा, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह राहुल गांधी से मिलने पहुंचे। बताया जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने राहुल से बात करते हुए प्रदर्शन खत्म करने की मांग की। इसके जवाब में राहुल ने उन्हें अपनी पांच मांगे बताई। इसके बाद जितेंद्र सिंह गृहमंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे। कांग्रेस ने चेकावनी दी है कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो वो पूरी रात पीएम आवास के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे।
कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने और लोकतांत्रिक विरोध को बलपूर्वक रोकने का आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता पर सरकार जवाब देने से बच रही है और संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराने से भी इनकार कर रही है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगने के लिए उनके आवास तक मार्च कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के साथ हुई कथित कार्रवाई की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। राहुल गांधी ने लिखा कि सरकार न तो जवाबदेही तय करना चाहती है और न ही संसद में इस गंभीर मुद्दे पर बहस कराना चाहती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से देश के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफे की मांग भी की।
कांग्रेस ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं। पहली, केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें। दूसरी, केंद्रीय गृह मंत्री संसद के दोनों सदनों में इस मामले पर विस्तृत बयान दें। तीसरी, छात्रों से जुड़े पूरे घटनाक्रम पर संसद में व्यापक चर्चा कराई जाए। चौथी, छात्रों की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से सुना जाए। पांचवीं, प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा और कार्रवाई की निष्पक्ष तथा स्वतंत्र जांच कराई जाए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी चिंताओं का समाधान करना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।