ट्विशा शर्मा केस: महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा- जांच में जरूरत हुई तो गिरीबाला को हिरासत में लेगी CBI

Prashant Singh Statement: महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा है कि CBI को अगर विवेचना के दौरान जरूरत हुई तो जांच एजेंसी गिरीबाला सिंह को हिरासत में ले सकती है। उन्होंने HC के आदेश के बारे में भी बताया।
CBI May Detain Giribala Singh
प्रशांत सिंह, महाधिवक्ता, मप्र सरकार (फोटो सोर्स- नवभारत)
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CBI May Detain Giribala Singh: भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत निरस्त होने के बाद अब सीबीआई उन्हें हिरासत में ले सकती है। इस मामले में महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा है कि यदि जांच के दौरान कस्टोडियल इंटेरोगेशन की जरूरत महसूस होती है, तो सीबीआई गिरीबाला सिंह को हिरासत में ले सकती है।

महाधिवक्ता ने बताया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बुधवार देर रात 17 पन्नों का आदेश जारी करते हुए गिरीबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। कोर्ट ने अपने आदेश में मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्य और परिस्थितियां किसी अपराध की ओर इशारा करती हैं। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि 'ऐसा लगता है कि किसी प्रकार का अपराध घटित हुआ है।

'हाईकोर्ट ने 7 चोटों का भी उल्लेख किया'

प्रशांत सिंह के मुताबिक अदालत ने अपने आदेश में ट्विशा शर्मा के शरीर पर मिले 7 चोटों का भी उल्लेख किया है। कोर्ट ने माना कि ये सभी चोटें एंटी मार्टम थीं, यानी मृत्यु से पहले लगी थीं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शव को नीचे उतारने या ले जाने के दौरान इस प्रकार की चोटें आना संभव नहीं है। हाईकोर्ट ने भोपाल की निचली अदालत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित परीक्षण किए बिना अग्रिम जमानत दे दी थी।

जांच में सहयोग नहीं करने पर जमानत रद्द करने की मांग की

महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि गिरीबाला सिंह ने अग्रिम जमानत की शर्तों का पालन नहीं किया। साथ ही उन्होंने जांच में भी किसी प्रकार का सहयोग नहीं किया। इसी आधार पर राज्य सरकार ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की थी।

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