ग्रीष्मकालीन अवकाश को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, छुट्टियों में अब 12 दिन खुलेगी अदालत

High Court Summer Vacation Schedule: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान काम के दिनों को लेकर बड़ा फैसला किया है। अब 30 दिन के अवकाश के दौरान अदालत में 12 दिन काम होगा।
Madhya Pradesh High Court Summer Vacation
जबलपुर हाई कोर्ट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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MP High Court News: इस बार हाई कोर्ट के ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान अदालतों के कामकाज को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। रजिस्ट्री द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार अब अवकाश अवधि में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को खुलेगा।

पहले अवकाशकाल में केवल सप्ताह में दो दिन (सोमवार और गुरुवार) ही सुनवाई होती थी, लेकिन इस बार 30 दिनों की छुट्टियों में कुल 12 दिन अदालत में कामकाज होगा।

जमानत मामलों को मिलेगी प्राथमिकता

नए आदेश के अनुसार जमानत और अग्रिम जमानत मामलों को प्राथमिकता से सूचीबद्ध किया जाएगा। धारा 438 CrPC और धारा 439 CrPC के तहत आने वाले मामलों के साथ-साथ एससी-एसटी एक्ट से जुड़े जमानत प्रकरण भी बिना अलग अर्जेंट आवेदन के सूची में लगाए जाएंगे। अन्य मामलों के लिए अर्जेंट सुनवाई के लिए आवेदन करना अनिवार्य रहेगा।

चीफ जस्टिस की पहल से बढ़ेगी सुनवाई

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की इस पहल का सबसे बड़ा फायदा जमानत, अग्रिम जमानत और अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई में होगा। फिलहाल जमानत संबंधी मामलों में रोजाना 700 से 800 केस सूचीबद्ध हो रहे हैं, जबकि केवल लगभग 100 मामलों की ही सुनवाई हो पा रही है। कई मामलों में अग्रिम जमानत की सुनवाई 10 से 15 दिन तक बोर्ड पर नहीं लग पाती, वहीं सजा के बाद जमानत याचिकाओं पर 30 से 35 दिन तक का समय लग जाता है।

जजों का रोस्टर जारी, बढ़ सकती है बेंच की संख्या

अवकाशकाल के दौरान सुनवाई के लिए जजों का अलग रोस्टर जारी किया गया है। प्रत्येक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को निर्धारित डिवीजन बेंच और सिंगल बेंच मामलों की सुनवाई करेंगी। अधिवक्ता मनीष यादव के अनुसार अवकाशकालीन बेंच में जजों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है और दो से तीन जजों की बेंच भी बैठ सकती है।

विशेष मामलों की सुनवाई का विकल्प

स्थगन और अत्यंत जरूरी मामलों में सोमवार, बुधवार और शुक्रवार के अलावा भी विशेष अर्जी के आधार पर सुनवाई कराने का प्रावधान रहेगा। इस फैसले से लंबित मामलों के बोझ में कमी आने और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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