MP News: हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला; निजी मंदिरों के प्रबंधन में सरकार का कोई हक नहीं

MP High Court News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक खोत ने बड़ा आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि निजी मंदिरों की संपत्ति और प्रबंधन में सरकार या कलेक्टर हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
Madhya Pradesh High Court Private Temple Judgment
जबलपुर हाईकोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Madhya Pradesh High Court Private Temple Judgment: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि निजी मंदिरों के प्रबंधन में सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मंदिरों की संपत्ति से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड में न तो कलेक्टर और न ही पुजारी को प्रबंधक या ट्रस्टी के रूप में दर्ज किए जाने की आवश्यकता है। इस प्रकार की संपत्ति को देवता के नाम पर ही दर्ज किया जाना चाहिए।

यह अहम आदेश एक पुजारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार किसी निजी मंदिर के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। जस्टिस दीपक खोत की बेंच ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि किसी भी मंदिर में प्रबंधन योजना लागू करने से पहले यह स्पष्ट रूप से तय किया जाए कि संबंधित मंदिर सार्वजनिक है या निजी।

इस मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया यह आदेश

बता दें कि, यह मामला डूंडा सिवनी गांव स्थित एक शिव मंदिर के सर्वराकर (मंदिर, मठ या धार्मिक संपत्ति के प्रबंधक/संरक्षक) द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है। याचिका में लोक न्यास रजिस्ट्रार द्वारा मंदिर के प्रबंधन के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने के आदेश को भी चुनौती दी गई है।

1913 में हुआ था इस मंदिर का निर्माण

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान पुजारी ने कोर्ट को बताया कि उनका परिवार पिछले चार पीढ़ियों से मंदिर की देखरेख करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1913 में स्वर्गीय भवानी पटेल द्वारा कराया गया था, और इसके रखरखाव तथा पुजारी के खर्च के लिए लगभग 14 एकड़ भूमि भी छोड़ी गई थी। आगे बताया गया कि वर्ष 1962-63 में सर्वराकर के रूप में सुमरन का नाम अधिकार अभिलेख में दर्ज किया गया था। हालांकि, गांव के कुछ लोगों की शिकायत के बाद लोक न्यास रजिस्ट्रार ने मंदिर के प्रबंधन के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने का आदेश जारी कर दिया।

कलेक्टर को सभी मंदिरों का प्रबंधक नहीं माना जा सकता- हाईकोर्ट

जस्टिस दीपक खोत की अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के फैसले स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश बनाम पुजारी उत्थान एवं कल्याण समिति का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिर में स्थापित देवता ही संपत्ति के वास्तविक स्वामी होते हैं, जबकि पुजारी का कार्य केवल पूजा-अर्चना करना और संपत्ति की देखरेख तक सीमित होता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी कलेक्टर को सभी मंदिरों का प्रबंधक नहीं माना जा सकता, जब तक संबंधित मंदिर राज्य सरकार के नियंत्रण या प्रबंधन में न हो।

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