अब लगेगी गेहूं के अवैध भंडारण पर रोक, जबलपुर प्रशासन का मास्टरप्लान; मुखबरी करने वाले को मिलेंगे इतने रुपये

Madhya Pradesh News: जबलपुर में गेहूं खरीदी की सुस्त रफ्तार के बीच प्रशासन सख्त। अवैध भंडारण और बिचौलियों की जानकारी देने वालों को मिलेगा ईनाम, 60 केंद्रों पर खरीदी जारी।
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राघवेंद्र सिंह, कलेक्टर, जबलपुर
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Jabalpur News: जबलपुर में अप्रैल माह खत्म होने को है लेकिन जिला प्रशासन अभी तक गेहूं खरीदी शुरू नहीं कर पाया, इसके इतर कई किसानों ने प्राइवेट व्यापारियों को ही कम कीमत में अपना गेहूं बेच दिया। बहरहाल अब जिला प्रशासन ने सहकारी समितियों तक किसानों को लाने के लिए एक बार फिर पुराना पैंतरा अपनाया है जिसके तहत अवैध रूप से गेहूं की खरीदी और भंडारण करने वालों की जानकारी देने वाले को ईनाम देने की घोषणा की है और उनका नाम गुप्त रखने का भरोसा जताया है।

कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के मुताबिक जिले में गेहूं खरीदी के लिए 60 केंद्र बनाए गए हैं। जहां अभी तक 13 हजार किसानों ने स्लॉट्स बुक किए हैं, जिनमें से से 516 किसानों से 18 हजार क्विंटल गेहूं खरीदा गया है।

मुखबिरों को मिलेगा ईनाम

आमतौर पर खरीदी केंद्रों में होने वाली लेटलतीफी और अन्य समस्याओं के चलते किसान अपनी उपज को प्राइवेट व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं, कलेक्टर के मुताबिक गेहूं खरीदी में किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए मुखबिरों का सहारा लिया जा रहा है जिन्हें ईनाम देने की घोषणा की गई है। वहीं अवैध भंडारण की जानकारी देने वालों को भी ईनाम दिया जाएगा। ईनाम की राशी क्विंटल के हिसाब से तय की गई है।

अवैध भंडारण (क्विंटल में) इनाम राशि (रुपए)
100 से 200 क्विंटल 5,000 रु.
200 से 500 क्विंटल 11,000 रु.
500 क्विंटल से अधिक 21,000 रु.

प्रशासन पहले भी कर चुका है यह प्रयोग

साल 2024 - 25 में भी जिला प्रशासन ने इसी प्रयोग के चलते लाखों क्विंटल अवैध गेहूं जब्त किया था। जिसमें जबलपुर से खरीदा जाने वाला गेहूं दूसरे जिलों में और दूसरे जिलों का गेहूं मध्य प्रदेश के जबलपुर लाकर बेचा जा रहा था। प्रशासनिक कार्यवाही से जहां दलालों में भय का माहौल था वहीं किसानों को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ा था क्योंकि प्राइवेट व्यापारियों को गेहूं बेचने के बाद वे किसानों के खेत या गांव में ही पूरे गेहूं का भंडारण कर देते थे जिसे प्रशासन अवैध भंडारण मानकर जब्त कर लेता था।

केंद्रों की अव्यवस्थाओं से परेशान हैं किसान

गौरतलब है कि किसान खरीदी केंद्रों की अव्यवस्थाओं के चलते सहकारी समितियों से परेशान हैं, सहकारी समितियों में समय पर स्लॉट बुक ना होने, उपार्जन की तुलाई और फिर भुगतान के लिए इंतजार करने से किसान परेशान हो जाता है।

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