Madhya Pradesh: गेहूं खरीदी में गड़बड़ी के आरोप...दिग्विजय सिंह ने उच्चस्तरीय जांच की उठाई मांग

MP News: मध्य प्रदेश में जारी गेहूं खरीदी अभियान के बीच दिग्विजय सिंह ने रायसेन और सीहोर जिलों में गेहूं के भंडारण और प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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दिग्विजय सिंह (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Digvijay Singh Letter To CM Mohan Yadav: मध्य प्रदेश में जारी गेहूं खरीदी अभियान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने रायसेन और सीहोर जिलों में गेहूं के भंडारण और प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

बुधवार को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 से 2020 के बीच खरीदे गए गेहूं के प्रबंधन में भारी लापरवाही बरती गई, जिसके चलते बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ और सार्वजनिक वितरण के लिए रखा गया अनाज बर्बाद हो गया।

दिग्विजय सिंह ने की निष्पक्ष जांच की मांग

दिग्विजय सिंह ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच राज्य के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से कराने की मांग की है। मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए सिंह ने दावा किया कि करीब 40 हजार टन गेहूं, जिसकी कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये है, लंबे समय तक भंडारण के कारण सड़ गया। वहीं, इसके रखरखाव और वेयरहाउसिंग पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ वित्तीय कुप्रबंधन नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था की विफलता भी है, जहां गरीबों के लिए रखा गया अनाज सड़ने के लिए छोड़ दिया गया।

दिग्विजय सिंह ने लगाए यह आरोप

दिग्विजय सिंह के अनुसार, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदे गए गेहूं को न तो भारतीय खाद्य निगम द्वारा समय पर उठाया गया और न ही इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत वितरित किया गया, जिससे अनाज खराब हो गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाद में खराब हो चुके गेहूं को अलग-अलग स्थानों पर स्थानांतरित किया गया, जिसमें सीहोर के बकतरा से रायसेन के गोदामों तक शिफ्ट करना शामिल है जिससे निजी वेयरहाउस संचालकों को फायदा पहुंचाया जा सके।

परिवहन ठेकों को लेकर भी लगाए आरोप

इसके अलावा, दिग्विजय सिंह ने परिवहन ठेकों में भी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि ये ठेके करीबी लोगों को दिए गए। कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि उन्होंने जुलाई 2023 में भी इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। यह आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं, जब राज्य सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी को तेज कर रही है और किसानों को बेहतर भंडारण व्यवस्था और समय पर भुगतान का भरोसा दे रही है।

दिग्विजय सिंह के इस पत्र के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या पिछली खामियों को दूर किया गया है और भविष्य में ऐसी हानि रोकने के लिए पर्याप्त उपाय किए गए हैं या नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है और चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे राज्य की वित्तीय साख और जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

एजेंसी इनपुट के साथ...

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